अफराजुल की हत्या के बाद घटनास्थल से सारे सबूत मिटा दिए गए

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पीपल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज, मजदूर किसान शक्ति संगठन और अमन बिरादरी कि एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने घटनास्थल और राजनगर कस्बे का दौरा किया, जिसकी रिपोर्ट अभी मीडिया में जारी नहीं की गई, लेकिन इसका खुलासा आपके सामने है।

मार्बल का टुटा हुआ स्लेब, पुलिस जाँचकारों के ज़रिए इस्तेमाल के बाद फेंके गए सर्जिकल ग्लव्स और खोजी कुत्ते, यह राजस्थान में राजसमन्द जिला के राजनगर क्षेत्र में उस जगह का दृश्य है जहाँ 6 दिसंबर को शंभूलाल रैगर ने अफराजुल इस्लाम खान को कुल्हाड़ी से बुरी तरह मारा, उसका सर काटने की कोशिश कि और फिर जिंदा जला दिया।

यह वही दिन था जिस दिन संघ परिवार के कार्यकर्ताओं ने यहाँ काफी दुरी पर यूपी के जिला अयोध्या में 25 साल पहले मस्जिद शहीद की थी। उस दिन को संघ परिवार ‘शोर्य दिवस’ के तौर पर मनाता है।

घटनास्थल पुलिस स्टेशन और कलक्टर के कार्यालय से एक किलोमीटर से भी कम की दुरी पर था और हाइवे और शादी के एक हाल से कुछ सौ मीटर की दूरी पर है। पुलिस ने सुबूतों की सुरक्षा के लिए उस क्षेत्र की न तो घेराबंदी की और न ही उसे सील किया इसलिए सारे सबूत जानबूझकर बर्बाद कर दिए गये।


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