अरविंद केजरीवाल को कोर्ट ने आपराधिक मानहानि के मामले में किया बरी

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दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेरा द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में बरी कर दिया है।

केजरीवाल ने साल 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर टेलीविजन प्रोग्राम में और प्रदर्शन के दौरान अभद्र टिप्पणी थी। इसी टिप्पणी के लिए शीला के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने केजरीवाल पर केस किया था जो अब तक चल रहा था। आरोप के मुताबिक, केजरीवाल ने दावा किया था कि शीला दीक्षित और बिजली कंपनियों के बीच गठबंधन था।

इस मामले में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने याचिका दायर कर निचली अदालत में चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई पर रोक लगाते हुये उसे खारिज करने की मांग की थी। मानहानि की यह शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने 2012 में दायर की थी।

जस्टिस एके पाठक ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली सरकार व शिकायतकर्ता पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था। उस फैसले के मुताबिक सांसद व विधायकों के मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिये।

याचिका पर जिरह करते हुए वरिष्ठ सुधीर नंदराजोग ने कहा था कि मानहानि की यह शिकायत दायर करने का पवन खेड़ा को कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनकी मानहानि नहीं हुई है। इसलिये इस मामले को खारिज किया जाना चाहिये।

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पूर्व राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा ने शिकायत दायर कर कहा था कि एक टीवी शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अक्तूबर 2012 में बिजली की बढ़ी दरों पर बोलते हुये ऐसी बातें कही जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री की बदनामी हुई थी।

पटियाला हाउस अदालत ने इस शिकायत पर अरविंद केजरीवाल को 31 जनवरी 2013 को बतौर आरोपी समन जारी किया गया था। इस शिकायत पर अदालत ने 28 अक्तूबर 2013 को आरोप तय किये थे।


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