“इंटरनेट और मेरे जीवन का सफ़र” – मोहम्मद एम० ज़की

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बहुत ज़माने पहले की बात है जब आपलोग छोटे छोटे हुआ करते थे, तब हम भी छोटे छोटे हुआ करते थे। उस समय टेलीकॉम कंपनियों के द्वारा इंटरनेट का विस्तार किया जा रहा था । वो समय था सन् 2007 का । इससे पहले किसी भी प्राइवेट टेलीकॉम कम्पनी ने इंटरनेट को मार्केट में नही उतारा था ।

तभी मात्र दो कम्पनी Aircel और Airtel ने इंटरनेट का प्लान शुरू किया था जिसके अंतर्गत एयरटेल 14 रूपये में 200 MB डाटा देता था जिसकी वैलिडिटी मात्र 3 दिन होती थी । मै उस वक़्त इंटरनेट के बारे में अखबारों में खूब पढ़ा करता था के इंटरनेट के माध्यम से कैसे नई नई जानकारी प्राप्त की जाती है और कैसे इंटरनेट के ज़रिये हम नई नई चीज़ें सीख सकते हैं ।

दैनिक जागरण अखबार के टेक्नोलॉजी तरक्की वाले segment को मै सबसे पहले पढ़ता था जिसमे रोज़ किसी वेबसाइट का नाम और उसके फ़ायदे के बारे बताया जाता था । लेकिन समस्या ये थी के इंटरनेट में ज़बरदस्त दिलचस्पी होने के बावजूद भी मै बस ये सब अखबारों में ही पढ़कर सब्र करता था क्योंकि उस वक़्त मेरे घर में वैसा कोई मोबाइल नही था जिससे इंटरनेट चलाई जा सके और ना ही मेरे पूरे खानदान में किसी के पास लैपटॉप या कम्प्यूटर था ।

और ना ही मुझे कम्प्यूटर के बारे में कुछ जानकारी थी कि साइबर कैफ़े जा कर उन वेबसाइटों को चेक कर सकूँ जिसके बारे में मै अखबारों में रोज़ पढ़ा करता था । मेरे अंदर इंटरनेट का एक्साइटमेंट दिन बदिन बढ़ता जा रहा था लेकिन कोई मोबाइल ना होने वजह से मै इंटरनेट के बारे में सिर्फ़ सोचा ही करता था ।

इतने पैसे भी नही थे कि चुपके से एक इंटरनेट वाला सस्ता सा ही मोबाइल ले लूँ । घर में पापा से भी इस बारे में नही कह सकते थे क्योंकि डाँट पड़ने का खतरा था। क्योंकि उस वक़्त मै VIII क्लास में ही था । मेरे ज़िन्दगी के दो साल इसी कश-मकश में गुज़र गए । फ़िर 10th बोर्ड का समय नज़दीक आ गया और दिल दिमाग में Exam का डर सताने लगा ।

फ़िर क्या था, Exam में कहीं फ़ेल ना हो जाऊँ इस डर से मैंने इंटरनेट के सपने देखने छोड़ दिये और पूरा दिमाग पढ़ाई के तरफ़ लगा दिया । दिन में स्कूल, शाम में उदय सर के यहाँ कोचिंग और रात को घर में किताबों पर अपना सर पटकने लगा । फिर एक दिन अचानक शेड्यूल के अनुसार Exam का वक़्त आ ही गया । दिल में डर और दहशत भरे हुए मै सेंटर पर Exam देने के लिए चला गया ।

मेरे सारे पेपर्स अच्छे गए फिर एक दिन अचानक रिज़ल्ट भी आ गया । पता चला के रिज़ल्ट देखने के लिए इंटरनेट की दुकान पर जाना पड़ता है, मैंने सोचा चलो इसी बहाने इंटरनेट से भी मुलाक़ात हो जाएगी और रिज़ल्ट भी देख लूँगा । भयानक डर के साथ हम अपना ऐडमिट कार्ड ले कर चल पड़े ।

दुकान पर देखा तो रिज़ल्ट देखने वालों का हुजूम लगा हुआ था । काफ़ी धक्का मुक्की के बाद हम दुकान के अंदर घुसें और अपना ऐडमिट कार्ड कंप्यूटर वाले भैया को देकर चेक करने को कहा । काफ़ी इंतेज़ार के बाद मेरा नम्बर आया और ऐडमिट कार्ड से Roll code और Roll No. को वेबसाइट में एंटर किया गया।

दिल में दहशत , चेहरे पर पसीना और सामने कंप्यूटर को टकटकी लगाए मै देख रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे ज़िन्दगी मिलेगी या मौत । फिर अचानक कंप्यूटर वाले ने ज़ोर से चिल्लाया “1st डिवीज़न” । मेरे ख़ुशी का ठिकाना नही रहा, इतनी ज़बरदस्त ख़ुशी के कारण मेरे हाथ काँप रहे थे ।

मैंने जैसे तैसे पौकेट से 20 का नोट निकालकर दुकान वाले को दिया और रिज़ल्ट लेकर दौड़ते हुए दुकान से बाहर निकल गया । दुकान वाला चिल्लाता रहा के भाई 10 रूपये वापस ले लो, रिज़ल्ट के 10 रूपये ही लगते हैं । हम उसकी बात सुनकर भी वापस दुकान के अंदर नही गए और रिज़ल्ट लपेट कर दौड़ते हुआ घर आ गए । घर में पापा अम्मी को रिज़ल्ट दिखाया तो सब बहुत खुश हुए ।

दूसरे दिन जब मै स्कूल गया तो पता चला के मै अपने स्कूल में दूसरे स्थान पर आया हूँ मतलब 2nd Rank..

Stand first अपना दोस्त राजेश कुमार आया था । और 3rd Rank अपने हुज़ैफा भाई आएँ थे । हम तीनों उस वक़्त एक icon की तरह स्कूल में चमक रहें थे । अनिल सर, वाइज़ुल हक़ सर, हेड सर और सारे टीचर्स काफ़ी खुश थे और सभी स्टूडेंट्स की सराहना कर रहें थे । मेरे भी ख़ुशी का ठीकाना नहीं था । फ़िर मैंने K.L.S college में I.sc में ऐडमिशन ले लिया ।

धीरे धीरे वक़्त गुज़रता रहा । अब मुझे फ़िर से इंटरनेट के दौरे पड़ने लगे । अखबारों में पढ़ पढ़ कर मै फ़िर इंटरनेट के बारे में सोचने लगा । सब्र का बाँध टूट रहा था फिर एक दिन अचानक किसी ने मुझे बताया के एक लड़का अपना मोबाइल 500 रुपये में बेच रहा है जिसमे इंटरनेट भी है ।

मैंने आव देखा ना ताव और अपना मिट्टी का चुक्का तोड़ दिया जिसमें मै कई सालों से पैसे जमा कर रहा था । कुल मिलाकर 429 रूपये निकले , अभी भी 71 रूपये की ज़रूरत थी पर टेनशन नही था. 20 रुपया पापा से मांगे और 50 रुपये अपने दोस्त से क़र्ज़ ले लिया और उसी दिन मै वो मोबाइल खरीदने चला गया । मैंने 499 रुपये देकर वो मोबाइल खरीद लिया । सौदा बुरा नही था, 499 में मोबाइल के साथ चार्जर भी फ़्री । छोटा सा मोबाइल था LG B2050. ख़ुशी की बात ये थी के उसमे इंटरनेट भी था ।

घर में किसी को डर से मोबाइल के बारे में नही बता रहें थे. फ़िर भी डरते डरते अम्मी को बता दिया । अम्मी ने तो कुछ नही डाँटा लेकिन फ़िर भी पापा का डर था । फ़िर पापा को भी पता चला तो पापा भी कुछ नही डाँटे । अब कोई दिक्कत नही थी । मैंने पापा के ID से एक एयरटेल का सिम कार्ड ख़रीद कर मोबाइल में लगा दिया ।

नये सिम के साथ 200 MB इंटरनेट भी फ़्री मिला । फ़िर एक एक कर के मैंने वो सारे वेबसाइट्स चेक जिसको अखबारों से cutting कर के मैंने रखा था । इंटरनेट का पहला एक्सपीरियेंस काफ़ी अच्छा लगा । लेकिन कुछ दिनों में 200 MB ख़तम हो गए तो काफ़ी अफ़सोस हुआ फ़िर भी पैसे जमा कर कर के मै महीने में कम से कम दो तीन बार 14 रूपये वाला पैक रिचार्ज करवा लेता था फिर इंटरनेट पर Google के माध्यम से Intermediate के question answer ढूँढता और notes तैयार करता ।

अब पढ़ाई में भी बहुत मज़ा आने लगा । कुछ दिनों बाद मैंने Spoken English सीखने के लिए British ज्वाइन कर लिया । वहाँ भी इंटरनेट से बहुत मदद मिली । जब किसी topic पर मुझे स्पीच देना होता तो मै इंटरनेट से उस topic के ideas और points खोजकर याद कर लेता और स्पीच में बोल देता ।
इस वजह से ब्रीटीश में भी मेरा काफ़ी अच्छा दबदबा रहा ।

वक़्त गुज़रता रहा । I.Sc के बाद मैंने B.sc में ऐडमिशन लिया । जब 2nd year में पहुँचा तो मेरे पापा के दोस्त “दिल्ली वाले uncle” ने मुझे मशवरा दिया के मुझे Computer science से Graduation करना चाहिए था, कम्प्यूटर और इंटरनेट के तरफ़ मेरा रुझान देखते हुए उन्होंने कहा के अगर हम BCA करते तो ज़्यादा अच्छा रहता ।

फिर क्या था, मैंने उसी साल Maulana Mazharul Haque University Patna में BCA में ऐडमिशन ले लिया । इधर B.sc final Year और उधर BCA part 1. टेनशन तो था लेकिन पढ़ना था और दोनों में सफ़ल होना था । B.sc final करने के बाद मैं पूरी तरह से BCA की तरफ़ कॉन्सेंट्रेट हो गया और एक Dell का लैपटॉप खरीद लिया ।

दिन में सुरज सर के यहाँ Cybotech में क्लास करते और शाम को घर में लैपटॉप पर प्रैक्टिकल करते । C, C++, Java programming का क्लास करते रहें और शाम में घर पर उसे दोहराते और कुछ extra भी करने की कोशिश करते । जब कुछ समझ में नही आता तो इंटरनेट पर सर्च कर के देख लेते फ़िर थोड़ी देर में उसे प्रैक्टिकल कर के सीख जाते । धीरे धीरे Programming languages में मेरी अच्छी पकड़ हो गई । BCA-I का exam हुआ, अच्छे मार्क्स आए ।

BCA-II मे मैंने VisualBasic.NET पर Software development सीखा । फ़िर इंटरनेट के माध्यम से मैंने Photoshop सीखा और Graphic Designing के सारे concepts सीख लिये । घर पे प्रैक्टिकल करता रहा और रोज़ कुछ न कुछ Graphic design करते रहें । सूरज सर और इंटरनेट की सहायता से हम इन दो साल के अंदर काफ़ी कुछ सीख गए थे ।

IT के क्षेत्र में मेरी काफ़ी अच्छी पकड़ हो गई थी । तभी उस वक़्त बिहार सरकार ने मिडिल स्कूलों के लिए शिक्षक की अच्छी खासी vacancy निकाली, चूँकि मेरे घर की financial condition कुछ अच्छी नहीं थी और आगे की पढ़ाई के लिए मुझे काफ़ी पैसे की भी ज़रूरत पड़ने वाली थी, पापा ने मशवरा दिया के अगर थोड़ी सी तैयारी करलो तो ये T.E.T Competition निकाला जा सकता है।

मैंने पापा के मशवरे को गंभीरता से लिया और मात्र 26 दिन जमकर T.E.T के लिए तैयारी किया । Competition exam दियें और qualified भी कर गए । फ़िर मेरा job मेरे ही टाउन के एक मिडिल स्कूल में हो गया । दिन में 6 घंटे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बाद हम रात को अपनी खुद की पढ़ाई करते रहें । फ़िर BCA का final exam हुआ । Result भी काफ़ी अच्छे आए ।

आज Graphic Designing के फ़ील्ड में मेरा ऊँचा मुकाम है । अबतक मै VB.NET के 13 Softwares develop कर चुका हूँ, और JNU jaipur से MCA कर रहा हूँ ।

ये सफ़र तब तक जारी रहेगा जबतक Computer science से दो चार बार Ph.d ना कर लूँ ।

अगर मै भविष्य में सफ़ल हो जाऊँगा तो इसका श्रेय मै अपने माँ-बाप और अपने शिक्षकों ख़ासकर मेरे आदर्श शिक्षक Suraj sir को देना चाहूँगा । मेरे इस सफ़र में इंटरनेट का एक अहम योगदान रहा है जो भुलाने योग्य नही है ।

– मोहम्मद एम० ज़की


(मोहम्मद एम० ज़की फेसबुक यूज़र हैं। यह लेख उनकी टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


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