कुष्ठ रोगियों के अधिकारों के लिए बोला सुप्रीम कोर्ट – “दिए जाएं बीपीएल कार्ड”

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नई दिल्ली। कुष्ठ रोगियों के अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट आगे आया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे कुष्ठ रोगियों के साथ भेदभाव रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं.सर्वोच्च अदालत ने कुष्ठ रोगियों की हालत परखने के लिए हर साल नेशनल सर्वे कराने का आदेश दिया. कहा कि कुष्ठ रोगियों की सकारात्मक छवि और अनुभव के के साथ व्यापक जागरुकता प्रचार हो. उनके लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाएं उपलब्ध हों.सभी को बताया जाए कि कुष्ठ रोग का इलाज फ्री है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कुष्ठ रोगियों को परिवार से अलग नही किया जा सकता और उस तरह जागरुकता फैलाई जाए कि उन्हें एकांतवास में ना भेजा जाए वो अपने परिवार के साथ खुशी खुशी वैवाहिक जीवन जी सकते हैं. कुष्ठ रोगियों को BPL कार्ड दिए जाने चाहिए.ऐसे रोगियों को मुफ्त में जूते भी दिए जाएं. स्कूलों में ऐसे बच्चों व परिवारों से भेदभाव न हो. इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार संबंधित कुष्ठ रोगियों को दिव्यांग सर्टिफिकेट भी जारी करने की संभावनाओं पर विचार करें.

बता दें कि इससे पहले इसी साल अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरा कुष्ठ रोगियों से भेदभाव के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि ऐसे कानून जो कुष्ठ रोगियों से भेदभाव करते हैं, उन्हें दूर रहने को इस बाबत एक बिल लाने जा रही है. ASG पिंकी आनंद ने कोर्ट को बताया कि अगले हफ्ते कैबिनेट में इस मामले को भेजा जाएगा. वहीं सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि टीबी की तरह कुष्ठ रोग को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है. इसमें कोई विवाद नहीं है और किसी भी पीड़ित को पीड़ा का सामना न करना पड़े.

सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, सिक्किम, महाराष्ट्र और मणिपुर ने जवाब दाखिल करते हुए अपने यहां की स्थिति साफ की. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को अपने कानूनों की जांच करने और सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया था ताकि कुष्ठ रोगियों से प्रभावित व्यक्तियों के खिलाफ ऐसा कोई भेदभाव न हो. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता तीन जजों की बेंच ने 119 प्रावधानों को चुनौती देने वाली हुए विधि की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया, जो कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करते हैं.


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