“क्‍या है निपाह वायरस (Nipah Virus)????”

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केरल में निपाह वायरस ने आज दो और लोगों की जान ले ली है. इनका इलाज कोझीकोड के मेडिकल कॉलेज में चल रहा था. इस बीमारी के इलाज के लिए बने अलग वार्ड में दोनों को रखा गया था. इस बीमारी चलते अब तक 11 लोगों की जान चुकी है. पिछले दो हफ़्तों में केरल के कोझिकोड ज़िले में इस वायरस से कम से 9 लोगों की मौत हो चुकी थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए केरल सरकार अलर्ट हो गई है. वहां के स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ बैठक की है. बैठक के बाद उन्होंने बताया कि इस वारयस के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इससे पीड़ित लोगों के खून के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं.

वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक कमेटी बनाई है जो बीमारी की तह तक जाने में जुटी है. साथ ही इस वायरस की जद में आने से लोगों को बचाने के लिए एहतियाती उपाय भी किए जा रहे हैं. लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने विषाणु के प्रकोप को रोकने के लिए केंद्र की मदद मांगी है. उन्होंने कहा कि यह एक ‘‘ घातक एवं दुर्लभ ’’ विषाणु है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में रामचंद्रन ने कहा कि उनके लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वताकरा में कुट्टियाडी तथा पेरम्ब्रा सहित कुछ पंचायत क्षेत्र ‘‘घातक विषाणु’’ की चपेट में हैं.

निपाह वायरस (एनआईवी) की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के कैम्पंग सुंगई निपाह में एक बीमारी फैलने के दौरान हुई थी. यह चमगादड़ों से फैलता है और इससे जानवर और इंसान दोनों ही प्रभावित होते हैं.

दक्षिण भारत के राज्य केरल के कोझिकोड़ जिले में निपाह वायरस (एनआईवी) से लोगों के बीच डर का माहौल बना हुआ है. यह एक तरह का दिमागी बुखार है जिसकी चपेट में आने से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है. फिलहाल इस बीमारी से निपटने के लिए कोई टीका या दवा मौजूद नहीं है. लेकिन हार्ट केयर फाउंडनेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल के बताए इन तरीकों से निपाह वायरस से बचा जा सकता है.

क्‍या है निपाह वायरस?
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के मुताबिक निपाह वायरस (NiV) एक ऐसा वायरस है जो जानवरों से इंसानों में फैल सकता है. यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है. इस वायरस का मुख्‍य स्रोत Fruit Bat यानी कि वैसे चमगादड़ हैं जो फल खाते हैं. ऐसे चमगादड़ों को Flying Fox के नाम से भी जाना जाता है.

कहां से आया निपाह वायरस?
इस वायरस की सबसे पहले पहचान 1998 में मलेश‍िया के Kampung Sungai के निपाह इलाके में हुई थी. उस वक्‍त वहां दिमागी बुखार का संक्रमण था. यह बीमारी चमगादड़ों से इंसानों और जानवरों तक में फैल गई. इस बीमारी की चपेट में आने वाले ज्‍यादातर लोग सुअर पालन केंद्र में काम करते थे. यह वायरस ऐसे फलों से इंसानों तक पहुंच सकता है जो चमगादड़ों के संपर्क में आए हों. यह संक्रमित इंसान से स्‍वस्‍थ मनुष्‍य तक बड़ी आसानी से फैल सकता है.

इसके बाद 2001 में बांग्‍लादेश में भी इस वायरस के मामले सामने आए. उस वक्‍त वहां के कुछ लोगों ने चमगादड़ों के संपर्क वाले खजूर खा लिए थे और फिर यह वायरस फैल गया.

निपाह वायरस के लक्षण क्‍या हैं?
निपाह वायरस के लक्षण दिमागी बुखार की तरह ही हैं. बीमारी की शुरुआत सांस लेने में दिक्‍कत, भयानक सिर दर्द और फिर बुखार से होती है है. इसके बाद दिमागी बुखार आता है.

निपाह वायरस के लक्षण:
निपाह वायरस (Nipah Virus) के इलाज का एकमात्र तरीका कुछ सहायक दवाइयां और पैलिएटिव केयर है. वायरस की इनक्यूबेशन अवधि 5 से 14 दिनों तक होती है, जिसके बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सामान्य लक्षणों में बुखार, सिर दर्द, बेहोशी और मतली शामिल होती है. कुछ मामलों में, व्यक्ति को गले में कुछ फंसने का अनुभव, पेट दर्द, उल्टी, थकान और निगाह का धुंधलापन महसूस हो सकता है.”

डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया, “लक्षण शुरू होने के दो दिन बाद पीड़ित के कोमा में जाने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं इंसेफेलाइटिस के संक्रमण की भी संभावना रहती है, जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है.”

कैसे फैलता है निपाह वायरस?
संक्रमित चमगादड़ों, संक्रमित सुअर या संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आने से निपाह वायरस फैलता है.

निपाह वायरस का इलाज क्‍या है?
अब तक निपाह वायरस का कोई वैक्‍सीन नहीं बन पाया है. इस वायरस का एकमात्र इलाज यही है कि संक्रमित व्‍यक्ति को डॉक्‍टरों की कड़ी निगरानी में रखा जाता है.

क्‍या सावधानी बरतनी चाहिए?
चमगादड़ों की लार या पेशाब के संपर्क में न आएं. खासकर पेड़ से गिरे फलों को खाने से बचें. इसके अलावा संक्रमित सुअर और इंसानों के संपर्क में न आएं. जिन इलाकों में निपाह वायरस फैल गया है वहां जाने से बचें.

निपाह वायरस से कैसे बचें:

1. सुनिश्चित करें कि आप जो खाना खा रहे हैं वह किसी चमगादड़ या उसके मल से दूषित नहीं हुआ हो. चमगादड़ के कुतरे हुए फल न खाएं.

2. पाम के पेड़ के पास खुले कंटेनर में बनी टोडी शराब पीने से बचें.

3. बीमारी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति से संपर्क न करें. यदि मिलना ही पड़े तो बाद में साबुन से अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें.

4. आमतौर पर शौचालय में इस्तेमाल होने वाली चीजें, जैसे बाल्टी और मग को खास तौर पर साफ रखें.

5. निपाह बुखार से मरने वाले किसी भी व्यक्ति के मृत शरीर को ले जाते समय चेहरे को ढंकना महत्वपूर्ण है. मृत व्यक्ति को गले लगाने से बचें और उसके अंतिम संस्कार से पहले शरीर को स्नान करते समय सावधानी बरतें

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जब इंसानों में इसका संक्रमण होता है, तो इसमें एसिम्प्टोमैटिक इन्फेक्शन से लेकर तीव्र रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और घातक एन्सेफलाइटिस तक का क्लिनिकल प्रजेंटेशन सामने आता है.

एनआईवी (NIV) की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के कैम्पंग सुंगई निपाह में एक बीमारी फैलने के दौरान हुई थी. यह चमगादड़ों से फैलता है और इससे जानवर और इंसान दोनों ही प्रभावित होते हैं.


 

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