दलितों के उत्पीड़न को ले कर, राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मेडल लेने से दलित छात्र का इंकार

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देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट दलित छात्र ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों से गोल्ड मेडल लेने से इनकार कर दिया है। छात्र का नाम रामेन्द्र नरेश है। रामेन्द्र ने 2013 से 2016 मास्टर इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन में टॉप किया है।
रामेन्द्र देश भर में हो रहे दलित अत्याचार से चिंतित हैं।

बीबीएयू के छात्र रामेंद्र नरेश का कहना है कि “देश के साथ-साथ विश्वविद्यालय में लगातार हो रहे दलित उत्पीड़न की वजह से मेरा मन दुखी हो गया है। इस उत्पीड़न के न रुकने के कारण दलित समाज के साथ बीबीएयू में दलित छात्र व प्रोफ़ेसर दोनों परेशान हैं। मैं ऐसे मेडल को लेकर क्या करूंगा जब मेरे दलित भाईयों को हीनभावना से देखा जाता है और उनको विभिन्न ढंग से प्रताड़ित किया जाता है।”

ऐसे में मेरा गोल्ड मेडल न लेना अपने आप में मेरे भाइयों के त्याग के लिए की जाने वाली कुर्बानी है। मैं विश्वविद्यालय द्वारा मेडल तभी स्वीकार करुंगा जब विश्वविद्यालय के साथ-साथ संपूर्ण भारत में दलितों को सम्मान और बराबरी की दृष्टि से देखा जाएगा।”

बता दें कि 15 दिसंबर, 2017 को होने वाले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बतौर मुख्य अतिथि आने वाले हैं। ये पहला मौका नहीं है जब बीबीएयू में देश के सर्वोच्च पद पर बैठे किसी अतिथि का बहिष्कार हुआ हो। इससे पहले 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी विरोध किया जा चुका है। मोदी तब दीक्षांत समारोह में आए थे। उस वक्त रोहित वेमुला के सुसाइड का मामला चरम पर था। तब राम करन निर्मल और उनके साथियों ने मोदी गो बैक के नारे लगाए गए थे।


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