‘दलितों के घर जाने वाले बीजेपी नेता भगवान राम की तरह हैं’ – राजेंद्र प्रताप सिंह

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नोएडा। एक ओर जहां मोदी सरकार दलितों के मन में अपनी सरकार की छवि को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर उनकी पार्टी के नेता, विधायक और मंत्री अपने बयानों और गतिविधियों से सरकार की फजीहत करा रहे हैं। बीजेपी जहां दलितों तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रही है, वहीं उनके नेता गलतियां कर न सिर्फ विवादों में घिर रहे हैं, बल्कि जाति के पुर्वाग्रह को भी मजबूत करते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने खुद को शामिल करते हुए बीजेपी नेताओं की तुलना भगवान राम से कर दी है, जो दलितों के घऱ जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं। वहीं, योगी सरकार में एक और मंत्री सुरेश राणा ने अलीगढ़ में दलित के घर बाहर से लाए गये शाही भोजन और मिनरल वाटर के साथ खाना खाकर इसे एक और नई परिभाषा दे दी है।

हालांकि, बीजेपी के दलित सांसद उदित राज ने कहा कि ऐसी घटनाएं दलित समुदाय के लिए अपनामजनक हैं। उन्होंने कहा कि आज के नए दलितों का मानना है कि यह उन्हें नीचा दिखाता है। मैं बीजेपी के प्रवक्ता के रूप में नहीं बोल रहा हूं बल्कि एक दलित के रूप में बोल रहा हूं। मैं इसका समर्थन नहीं करता हूं कि एक सवर्ण दलित के घर यह बोलने जाता है कि देखो वे नीच हैं और दूसरे ऊंचे हैं।

योगी सरकार में मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि दलित घर में खाना खाकर उन्होंने वही किया जो राम ने शबरी के बेर खाकर किया था। दलित के घर भोजन करने के बाद राजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि ‘रामायण में राम और शबरी बातचीत का वर्णन किया गया है। आज जब मैं यहां आया, तब ज्ञान की मां ने मुझे भोजन दिया। उन्होंने कहा कि मुझे भोजन करा कर उन्हें आशीर्वाद मिला और उन्होंने कहा कि मैं क्षत्रिय हूं, धर्म, समाज की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।’

इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्री सुरेश राणा अलीगढ़ के लोहागढ़ में एक दलित के घर खाना खाने पहुंचे। वहां खाना खाया भी। लेकिन मंत्रीजी के लिए खाना, पानी और बर्तन का इंतजाम बाहर से हुआ। उनके रात रुकने के लिए गद्दों और कूलर का इंतजाम भी किया गया।

हालांकि, घर के मालिक रजनीश ने कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि उसके घर कभी मंत्री रात के ग्यारह बजे अचानक आ सकते हैं। रजनीश ने कहा कि मुझे नहीं पता था कि मंत्री जी रात के खाने पर मेरे घर आ रहे हैं। वह अचानक आ गये। उनके खाने-पीने का सारा इंतजाम बाहर से किया गया।

दरअसल, एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार पर दलितों की उपेक्षा के आरोप लगे। इस फैसले के विरोध में भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद कुछ बीजेपी शासित राज्यों में दलित युवाओं के खिलाफ कथित ज्यादती को लेकर बीजेपी के भीतर से ही आवाज़ें उठीं। कुछ बीजेपी सांसदों ने पीएम को पत्र लिखा। विपक्ष ने माहौल बनाना शुरू किया कि 2014 के चुनाव में बहुत मुश्किल से जुटाए गए दलित वोट बीजेपी के पाले से खिसकने लगे हैं।


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