दूसरी बार गुजरात के CM बने रूपाणी

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गुजरात में छठी बार भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सरकार बनाई है। विजय रूपाणी ने मंगलवार को दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 18 दिसंबर को आए नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी के लिए खतरे की घंटी तो बजा दी है। चूंकि पिछले 22 साल में ये पहली बार है जब बीजेपी की सीटें 100 से नीचे गई हैं। चुनाव से पहले कई मुद्दों पर बीजेपी सरकार बैकफुट पर थी। अब सरकार बनने के बाद भी ये मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही विजय रूपाणी के लिए ये चुनौतियां उनका इंतज़ार कर रही हैं।

विजय रूपाणी और नितिन पटेल के सामने सबसे अहम चुनौती राज्य के ग्रामीण इलाकों में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने की है। बीते चुनावों में जिस तरह पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ कांग्रेस के हाथ खोई है उससे केन्द्रीय नेतृत्व सकते में हैं। वहीं 2019 के आम चुनावों के मद्देनजर एक बार फिर से मुख्यमंत्री बन रहे रूपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल को ग्रामीण इलाकों को विकास के गुजरात मॉडल के दायरे में लाना होगा। पार्टी ने इस चुनाव में गुजरात के चार बड़े शहरों में ही सर्वाधिक सीटें जीती हैं।

2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने राज्य की सभी सीटों पर विजय हासिल कर प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी को मजबूत करने का काम किया है। लेकिन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन से एक बार फिर चुनौती 2019 में पीएम मोदी को मजबूत करने के लिए राज्य की सभी लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने की है। 2014 में पार्टी ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ करते हुए सभी 26 सीटों पर परचम लहराया था। ऐसे में 2019 में एक सीट भी कम होने पर पार्टी की साख पर बट्टा लग सकता है।

गुजरात में बीजेपी सरकार के बीते चार कार्यकाल में तीन के दौरान नरेन्द्र मोदी खुद राज्य का नेतृत्व कर रहे थे। उस दौरान लगातार राज्य में कांग्रेस एक कमजोर विपक्ष की भूमिका में रही। लेकिन विजय रूपाणी की पिछली बीजेपी सरकार के बाद पार्टी को एंटीइन्कंबेंसी के असर से सत्ता गंवाने का गंभीर खतरा खड़ा हो गया था।

लेकिन किसी तरह पार्टी की साख बचाने में कामयाब होने के बाद भी बीजेपी की नई सरकार के सामने विधानसभा में एक मजबूत विपक्ष के तौर पर कांग्रेस पार्टी मौजूद रहेगी। लिहाजा, इस सरकार ने बीजेपी को विधानसभा के रास्ते राज्य के लिए नीतियां निर्धारित करने में कांग्रेस के मुखर विरोध का सामना करना होगा। इस बार भाजपा को विधानसभा में पहले से ज्यादा मजबूत विपक्ष मिलेगा। ये भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।

राज्य की नई विधानसभा में विपक्ष के खेमें से बीजेपी सरकार के लिए एक राहत है हालांकि इसका फायदा उठाने के लिए उसे अपने तजुर्बे का सहारा लेना होगा। विधानसभा में कांग्रेस के पास अधिकांश ऐसे विधायक हैं जो पहली बार चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे हैं। हालांकि यह नए नेता जनता के बीच मुखर रहे और चुनाव में बीजेपी के नुकसान का कारण भी बने।


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