दोगलापन : “जाकिर नाईक को बैन, ISI के जासूस कुत्तों के पालनहार संघ-भाजपा को छूट” – मुहम्मद ज़ाहिद

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zzzबंगलादेश में एक आतंकवादी घटना होती है, उसमें एक आतंकवादी डाक्टर ज़ाकिर नाईक को फेसबुक पर फालो करता था, डाक्टर ज़ाकिर नाईक पर मुकदमा हुआ, उनकी संस्था “इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन” पर छापा हुआ और उसे प्रतिबंधित कर दिया गया, बाद में इस संस्था पर आईएस के किसी सदस्य को मात्र ₹10 हज़ार देने का आरोप लगा दिया गया, संस्था सील कर दी गयी।

मीडिया, प्रिन्ट मीडिया और सोशल मीडिया कई दिनों तक छापता और दिखाता रहा, डाक्टर ज़ाकिर नाईक को आतंकवादी बना दिया गया जबकि उन्होंने अपने जीवन में एक चूँटी भी नहीं मारी। फेसबुक पर किसी फालोवर्स के गुनाह का ज़िम्मेदार उस फेसबुक पेज का एडमिन होगा, यह भारत की नयी निज़ाम का संविधान है।

इसी देश की सभी संस्थाएँ, सभी मीडिया और यहाँ तक कि सिविल सोसाइटी डाक्टर ज़ाकिर नाईक के विरुद्ध की गयी इस गुंडागर्दी के विरुद्ध चूँ भी नहीं बोलती, मनुस्मृति के आधार पर फैसले देने वाली अदालतें भी सरकारी तोता बनकर फैसले सुनाती रहीं।

मध्य प्रदेश से कुल 13 आईएसआई एजेंट गिरफ्तार हुए, जिन्होंने देश की सेना की मूवमेंट और सेना का रोडमैप सहित तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आईएसआई को सौंपी, इनके पास से 50 मोबाइल, 5000 सिम कार्ड और पूरा एक बाक्स ऐक्टिव पैक सिम कार्ड का बरामद हुआ है, पाकिस्तान से इनके सैकड़ों खातों में पैसे आते रहे हैं, फिलहाल मौजूदा जानकारी के अनुसार प्रति खूफिया इनपुट ₹40000/= की दर से यह आईएसआई से पैसे सीधे पाकिस्तान से अपने सैकड़ों बैंक खातों में प्राप्त करते रहे हैं।

गिरफ्तारी के बाद चहुँओर सन्नाटा है, मीडिया, सोशलमीडिया और सिविल सोसाइटी, मौनव्रत धारण किए हुए है क्युँकि यह लोग पहली बात तो मुसलमान नहीं हैं और दूसरी बात कि इनके कार्य भाजपा के साईबर सेल से संचालित होते थे।

सोचिएगा कि भाजपा का साईबर सेल देश के विरुद्ध कितना खतरनाक काम कर रहा था और करता है परन्तु सब चुप हैं। ज़ी टीवी हो या एनडीटीवी किसी की हिम्मत नहीं है कि कोई इसे प्रमुखता से दिखा दे। सोशल मीडिया के बड़े बड़े धर्मनिरपेक्ष नाम भी चुप हैं। धुरंधर।

डाक्टर ज़ाकिर नाईक पर प्रतिबंध और कानूनी कार्यवाही और भाजपा की आईटी सेल पर चुप्पी?
यह दोगलापन क्या कहता है?
रामराज?
वह भी राजा हरिश्चंद्र के देश में?

क्या इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की तरह ही भारतीय जनता पार्टी पर प्रतिबंध और इसके मुखिया अमित शाह और इसकी जड़ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए?

किसी की औकात भी नहीं क्युँकि हक़ीक़त यह है कि हम बहुत हल्के लोग हैं और संघ उससे कहीं अधिक शातिर।

यदि जवाब नहीं है तो दोगलापन स्विकार करने का देश का साहस और समर्थ देखिए। और देखिए कि धर्म के आधार पर इस देश में दोगलेपन की परिकाष्ठा कितनी है और इसकी सीमा क्या है……………..?

भारत की सभी व्यवस्थाओं पर यह राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की जीत है। है किसी की हिम्मत की बोल दे……..?

…………………राहुल गाँधी, मुलायम सिंह यादव और कम्युनिस्ट जैसे तमाम नेताओं की चुप्पी संघ की जीत का उदाहरण है।

और तो और ………………… ओवैसी भी चुप हैं।

………..यही है ZERO TOLERANCE की जलती चिता……………………….।


आप इस लेख को www.mohdzahid.com पर भी पढ़ सकतें हैं………..।

-मुहम्मद ज़ाहिद

मुहम्मद ज़ाहिद

मुहम्मद ज़ाहिद

(मोहम्मद जाहिद मीडिया एक्टिविस्ट हैं, इनकी लेखनी बेबाक है। मुहम्मद ज़ाहिद फेसबुक यूज़र हैं। मुहम्मद ज़ाहिद की एक वेबसाइट भी है जिसका नाम www.mohdzahid.com है। यह लेख उनकी वेबसाइट से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


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