“न्यायाधीश कर्णन की तरह क्या न्यायाधीश शर्मा के मामले में भी मानसिक जांच संभव होगा?” – अजय खरे

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राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश महेश शर्मा ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की सिफारिश में कहा कि मोर कभी सेक्स नहीं करता, हमेशा ब्रह्मचारी रहता है और मोरनी मोर के आँसूओ से गर्भवती होती है। यह बात गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के विषय में संदर्भहीन है । वहीं इसकी प्रमाणिकता भी संदेहास्पद है ।

अब सवाल यह है कि क्या मोर भी हनुमान जी की किवदंती की तरह ब्रह्मचारी है?

हनुमान जी के बारे में यह किवदंती है कि वह पिता बने लेकिन उनका ब्रह्मचर्य भंग नहीं हुआ। अपनी जलती पूंछ से रावण की सोने की लंका में आग लगाते समय हनुमान जी पसीने से तरबतर थे। पूंछ में लगी आग बुझाने जब वह समुद्र पहुंचे तो उनके पसीने की टपकी बूंद पीने से एक समुद्री मछली गर्भवती हो गई । इस बात से हनुमान जी पूरी तरह अनभिज्ञ थे। कालांतर में उस मछली के गर्भ से जन्मे मकरध्वज का हनुमान जी से मुकाबला हुआ तब सच्चाई का पता चला।

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कर्णन के द्वारा सर्वोच्च अदालत के विरुद्ध दिए गए विवादास्पद फैसलों पर नाराजगी जताते हुए उनकी मानसिक जांच के आदेश जारी किए हैं क्या ऐसा न्यायाधीश शर्मा के मामले में भी संभव होगा?


– अजय खरे

अजय खरे

(रीवा के रहने वाले अजय खरे ने अपनी शिक्षा रीवा में ही ग्रहण की। वह एक सामाजिक सेवक हैं। अजय खरे समाजवादी जान परिषद् के नेता हैं। इनकी लेखनी बेबाक है। अजय खरे फेसबुक यूज़र हैं। यह लेख उनकी फेसबुक की टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


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