नज़रिया : “मलयाली फिल्म सेक्सी दुर्गा और गन्दगी की सड़ाँध से भरा भगवा आतंकवादी पत्रकार रोहित सरदाना” – मुहम्मद ज़ाहिद

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“ज़ी न्यूज़” में ताल ठोकने के बाद “आज तक” में “दंगल” कर रहे भगवा आतंकी पत्रकारिता के रोहित सरदाना ने एक फ़िल्म “सेक्सी दुर्गा” के टाईटिल की प्रतिक्रिया में हुज़ूर सल्ल्लाहु अलैहे वसल्लम हज़रत मुहम्मद के परिवार पर अभद्र टिप्पणी ट्विट कर दी।

मलयालम में बनी इस फ़िल्म का टाईटल जितना निंदनीय है उससे अधिक निंदनीय है रोहित सरदाना की टिप्पणी क्युँकि इस फिल्म के निर्माण में किसी भी मुसलमान का कोई भी संबन्ध नहीं है।

यदि रोहित सरदाना की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं तो भारतीय लोकतंत्र में उनके पास कानूनी विकल्प सर्वश्रेष्ठ विकल्प है या तो बहुत नीच प्रतिक्रिया ही देनी थी तो “सेक्सी दुर्गा” फिल्म के निर्माता, निर्देशक, अभिनेता और अभिनेत्री के साथ साथ फिल्म से जुड़े एक एक सदस्य की बहन बेटी पर अभद्र टिप्पणी कर सकते थे।

जो मुसलमान इस फ़िल्म के निर्माण में कहीं है ही नहीं उनके “नबी” पर रोहित सरदाना की अभद्र टिप्पणी पत्रकारिता के उस निम्न स्तर को दिखाती है जहाँ निष्पक्षता नंगी चौराहे पर खड़ी अट्टहास लगाती है।

आईए समझते हैं कि पूरा विवाद क्या है?


  • सेक्सी दुर्गा” एक मलयाली फिल्म है जिसे डायरेक्टर किया है सनल कुमार शशिधरन और सनल की यह तीसरी फिल्म है।

  • महत्वपुर्ण बात यह है कि उन्होंने बिना किसी रीटेन स्टोरी के इस फिल्म को एक ही रात में शूट किया है।

  • ध्यान दीजिए “सनल कुमार शशिधरन” मुसलमान नहीं हिन्दू हैं।

  • इस फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं। यह 23 सालों में बनी पहली भारतीय फिल्म है, जिसने अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव रॉटरडैम (आईएफएफआर) में टाईगर पुरस्कार जीता है।

  • ध्यान दीजिए कि “अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव रॉटरडैम (आईएफएफआर)” की जूरी में शायद ही कोई मुसलमान हो, और हो भी तो जूरी का निर्णय वोटिंग के आधार पर होता है तो इतना तो निश्चित है कि कोई मुसलमान टाईगर पुरस्कार का निर्णय लेने का एकाधिकार नहीं रखता होगा।

  • हालांकि, सेंसर बोर्ड ने इस मूवी का नाम “सेक्सी दुर्गा” से बदलकर एस दुर्गा करने का एक अच्छा आदेश दिया था। जब फिल्म में टाईटिल के अतिरिक्त कुछ भी आपत्तीजनक ना हो तो ऐसे टाईटिल केवल फिल्म को विवादास्पद चर्चा दिलाने के लिए ही होते हैं जो कि आज की कमज़ोर धार्मिक भावना वाले देश में नहीं करना चाहिए।

खैर……….

गोवा फिल्म फेस्टिवल के लिए “सेक्सी दुर्गा” को 13 सदस्यों के जूरी ने 178 फिल्मों में से प्रदर्शित की जाने वाली 20 विशिष्ट फिल्मों में चुना था।

ध्यान दीजिए कि गोवा फिल्म फेस्टिवल के इन 13 सदस्यी जूरी में कौन मुसलमान है……..?

कोई नहीं, जूरी के प्रमुख कौन हैं?

सुजाॅय घोष।

गोवा फिल्म फैस्टिवल में शामिल होने पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा “सेक्सी दुर्गा” पर लगाई रोक के विरोध में सुजाॅय घोष ने जूरी के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया।

ध्यान दीजिए सुजाॅय घोष एक हिन्दू हैं वह भी उस समुदाय और क्षेत्र से आते हैं जहाँ “दुर्गा” की सार्वधिक मान्यता है।

खैर आईए देखते हैं “सेक्सी दुर्गा” की कहानी पर:


  • इस फिल्म में पैट्रिआर्कल सोसायटी को हाईलाइट किया गया है फिल्म के ट्रेलर में एक भागते हुए “जोड़े” को दिखाया गया है। “जोड़ा” सड़क पर खड़े होकर रात में लिफ्ट मांगता है इस दौरान उसे हॉरर का सामना होता है यह एक थ्रिलर मूवी है।

  • जिसमें कहीं भी मुस्लिम ऐंगल नहीं है।

  • फिल्म में राजश्री देशपांडे और कन्नन नायर ने एक्टिंग की है।

  • ध्यान दीजिए कि यह दोनों कलाकार भी मुसलमान नहीं बल्कि हिन्दू हैं।

  • फिल्म में एक नॉर्थ इंडियन लड़की है जिसका नाम दुर्गा है और वह अपने घर से केरल के एक लड़के के साथ भाग जाती है। इन दोनों लड़की और लड़के को को सड़क पर जिस गाड़ी में लिफ्ट मिलता है, वह एक गैंगस्टर की गाड़ी होती है।

  • ध्यान दीजिए कि इस पूरी कहानी में कहीं भी मुस्लिम ऐंगल नहीं है।

  • सोचिएगा अब जिस फिल्म से इस्लाम मुसलमान और नबी का कोई संबन्ध नहीं उसके विरोध में की गयी टिप्पणी पर नबी के परिवार पर अभद्र टिप्पणी क्युँ?

  • वह भी खुद को देश का सबसे विश्वसनीय चैनल कहने वाले “आज तक” के एक पत्रकार “रोहित सरदाना” द्वारा?

  • बदले भारत में फिल्मकार आज की परिस्थियों का फायदा उठाने के लिए समाज में ही घृणा भर रहे हैं और ऐसे विवादास्पद विषय पर फिल्म बना रहे हैं जो या तो कट्टर हिन्दुत्वादियों को पसंद आए या उनके विरोधियों को।

  • “पद्मावती”, “सेक्सी दुर्गा” और “अयोध्या” ऐसी ही फिल्में हैं जिनका कोई सच नहीं होता, सच केवल और केवल वित्तीय लाभ कमाना होता है।

देश की जनता को यह सच समझ लेना चाहिए………।

खैर, रोहित सरदाना एक “भगवा आतंकवादी पत्रकार” है और उसके ट्विट पर भारत के मुसलमानों ने जो प्रतिक्रिया दी है वह स्वागत योग्य है।

जब इस देश के कानून में “धार्मिक भावनाओं” को भड़काने के विरुद्ध दंड का प्रावधान है तो बेहतर तो यही है कि यही प्रक्रिया अपनाया जाए और रोहित सरदाना पर 9 जगह मुकदमा दर्ज कराकर मुसलमानों ने समझदारी का परिचय दिया।

यह समझदारी तब और महत्वपुर्ण हो जाती है जब “गुर्जर हिंसक आंदोलन”, “जाट हिंसक आंदोलन”, “रोहतक”, “पंचकुला”, पाटीदार आंदोलन, अयोध्या आंदोलन इस देश में हक के आंदोलन कहे जाते हैं

और मुसलमानों के कुछ हज़ार के अहिंसक आंदोलन “देश विरोधी”……।


-मुहम्मद ज़ाहिद

मुहम्मद ज़ाहिद

(मोहम्मद जाहिद मीडिया एक्टिविस्ट हैं, इनकी लेखनी बेबाक है। मुहम्मद ज़ाहिद फेसबुक यूज़र हैं। मुहम्मद ज़ाहिद की एक वेबसाइट भी है जिसका नाम www.mohdzahid.com है। यह लेख उनकी फेसबुक की टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


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