पेंटागन का दावा – अमेरिका पर हमले की तैयारी कर रहा है चीन

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एशिया में अमेरिकी प्रभाव को रोकने के लिए चीन जबर्दस्त सैन्य तैयारी में जुटा हुआ है। अमेरिकी सेना से लड़ाई की स्थिति में टक्कर लेने के लिए चीन लंबी दूरी के बमवर्षक का निर्माण कर रहा है और अपने लड़ाकुओं को प्रशिक्षण भी दे रहा है। पेंटागन ने ये खुफिया जानकारी अमेरिकी सरकार को दे दी है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन बमवर्षक बनाने में भारी निवेश कर रहा है और उसकी मंशा अपना वैश्विक प्रभाव बढ़ाने की है।

चीन ने पिछले साल अपनी सेना पर 190 अरब डॉलर खर्च किए थे और जानकारी के अनुसार साल 2028 तक अपना रक्षा बजट 240 अरब डॉलर कर सकता है। पेंटागन ने भी दावा किया गया है कि पिछले तीन साल में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अपने बमवर्षक विमानों के मारक क्षेत्र का भी काफी विस्तार कर दिया है।

अपनी सैन्य ताकत को सबसे मजबूत बनाने के लिए ड्रैगन महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों की परिस्थितियों का अनुभव हासिल कर रह है। और ये अनुभव अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ संभव लड़ाई में हमलों को अंजाम देने के प्रशिक्षण का हिस्सा है। खबर ये भी है कि चीनी वायुसेना को एक बार फिर न्यूक्लियर मिशन सौंपा गया है। चीनी वायुसेना इन लॉन्ग रेंज बाम्बर्स की सहायता से अपनी परमाणु हथियार क्षमताओं को पूरा करने की कोशिश कर रहा है।

पेंटागन की रिपोर्ट कई हद तक सही साबित होती नजर आ रही है क्योंकि चीन अपने आस-पास के देशों में भी लगातार अपने सैन्य ठिकाने स्थापित कर रहा है। यही नहीं चीन की मंशा उससे दूर देशों में भी अपने नेवल बेस स्थापित करने की है। चीन ने अपना पहला विदेशी नेवल बेस अफ्रीका के जिबूती में बनाया था। वह अन्य दूसरे मित्र और समान रणनीति वाले देशों जैसे पाकिस्तान में ऐसे नेवल बेस तैयार करना चाहता है।

लेकिन अमेरिका की चिंता ये है कि बमवर्षक बेड़े का निर्माण करने के साथ चीन अपने पायलटों को संभवत: उस पर हमला करने का प्रशिक्षण भी दे रहा है।साथ ही ताइवान में भी चीन अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। उधर, चीनी सेना की डिजिटल कॉम्बेट यूनिट ने किंघई-तिब्बत पठार में लाइव फायर ड्रिल भी शुरू कर दी है। चीन एशिया में अपना दब-दबा बनाने के लिए भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है और इसलिये ये खबर भारत के लिए भी चिंताजनक है। अमेरिका की पूरी कोशिश है कि चीन को आर्थिक और सैन्य दोनो मोर्चे पर रोका जाये ताकि वो अमेरिका के लिए चुनौती ना बन पाये।


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