“प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ इस जहां में नूर (प्रकाश) फैलाने आए” – सद्दाम हुसैन अन्सारी

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प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ इस जहां में नूर (प्रकाश) फैलाने आए। उन्होंने शराब,जुआ, संगीत, औरतों की आज़ादी, किसी की गुलामी और किसी निर्दोष को बेवजह सताना आदि कामों से मना फ़रमाया है।

प्यारे नबी का जन्म दिवस सोमवार(पीर) के दिन हुआ। आपकी जन्म दिवस की तारीख अहमद रज़ा बरेलवी के मुताबिक 8 रबीउल अव्वल बताई गई है जबकि अन्य किताबो ने 9 अथवा 11 भी बताई गई है। अब्राहा वाला या हाथियों वाले दिन से भी इनके जन्म दिवस को जाना जाता है।

अब आइये प्यारे नबी ﷺ से संबंधित उनके जन्म दिवस मनाने के विचारों पर:

आप ﷺ ने बड़ी सादगी से अपना जीवन यापन किया। आपने हर हुनर सीखा। आपने तिज़ारत की आपने घर के कामो में हाथ बँटाया, हत्ताकी आपने बकरिया तक चराई और उनसे सिख लेने को हदीस के जरिए हिदायत दी।

आपने शैतानी कामों से मना फ़रमाया। जिसमे संगीत को सबसे बुरा जाना। शिर्क से बचाया। आज उसी उम्मते मुहम्मदिया के मानने वाले तथाकथित आशिके रसूल ﷺ म्यूजिक या गाने बाजे के साथ रीमिक्स नातख़्वानी के साथ झण्डे और विभिन्न तरह के करतबों के ज़रिए इस्लाम का नाम रौशन कर रहे है।

उसी प्रकार जिस प्रकार मुहर्रम उल हराम पर ढोल नगाड़ो से नवासा ए रसूल ﷺ का रौशन कर रहे हैं। एक और औरतों को मस्ज़िद में नमाज़ की इजाज़त नहीं तो दूसरी तरफ औरतें गैर मेहरम मर्दों की निगाहों की शिकार हो रही है।

क्या यही उम्मते मुस्लिमा की कामयाबी का तरीका है????

क्या अहले सुन्नत इसी का नाम है………………………………………..।

हकीकत यह है कि हकीकत खुराफ़ात में खो चुकी है। अब हमें क़ुरआन व हदीस के बगैर कोई राहत नहीं। हमें दज्जाली निज़ाम से फुर्सत मिले तो दीनी ख़िदमात और जरूरियात पर भी फोकस करना चाहिए।

हमें उनकी बताई गई शिक्षाओं पर भी ध्यान देना चाहिए और हकीकी कामयाबी बस इसी में ही छिपी हुई हैं। नबी हर पीर को रोज़ा रखते थे।

हमें काफिरों की राह इख्तियार करते हुए बर्थ डे की जरूरत नही अगर ऐसा होता तो सहाबा, ताबेईन, तब-ताबेईन, अहनाफ़ वगैरा भी इसी प्रकार से ऊँटो पर चढ़कर या सोने-जवाहरात लुटाकर प्यारे रसूल ﷺ का यौमे मीलाद मनाते और किसी भी तरह का इख़्तेलाफ़ नही होता उसी प्रकार जिस प्रकार नमाज़ों में किसी भी मसलक अथवा फिरकों का इख़्तेलाफ़ नही है।

उम्मीद है आप इसे गंभीरता से लेकर सच्चे दीन दीने इस्लाम की पैरवी करेंगे। अगर अगर दिखावा करना ही इस्लाम या नबी से मुहब्बत है तो ऐसा दिखावा हमें कतई बर्दाश्त नहीं, क्योंकि अल्लाह तो नमाज़ भी दिखावे वाली पसन्द नही फरमाता और ऐसे लोगों की नमाज़ तक उनके मुँह पर मार दी जायेगी। सोंचो हम कहाँ जा रहे हैं!

#KnowMuhammad (ﷺ)


-सद्दाम हुसैन अंसारी

सद्दाम हुसैन अंसारी

(सद्दाम हुसैन अंसारी फेसबुक यूज़र हैं। यह लेख उनकी फेसबुक की टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।

 


 

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