फूलपुर लोकसभा उपचुनाव- सभी पार्टियों में है कांटे की टक्कर

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर सीट के लिए होने वाले लोकसभा उपचुनाव पर देश भर की नजर लगी हुई है। एक सीट सूबे के मुख्यमंत्री की है और और दूसरी उपमुख्यमंत्री की। इनमें से खासकर फूलपुर की सीट का टकराव कफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसके नतीजे 2019 के राजनीतिक समीकरण तय करने के लिहाज से भी अहम होंगे। इसलिये फूलपुर में बीजेपी ने रैलियों की झड़ी लगा दी है। पहली बार हासिल ये सीट वो खोना नहीं चाहती। जबकि बीएसपी ने यहां उम्मीदवार न उतार कर और सपा को समर्थन देने का एलान कर उसकी चुनौती कड़ी कर दी है।

फूलपुर एक ऐतिहासिक सीट रही है। यहां से नेहरू जीते, यहां से राम मनोहर लोहिया ने उनको चुनौती दी और हारे। यहां से विजयलक्ष्मी पंडित जीतीं, यहां से कांशीराम चुनाव लड़े, यहीं से वीपी सिंह 1971 में जीते। छोटे लोहिया कहलाने वाले जनेश्वर मिश्र ने भी अपना परचम लहराया था। 2014 से पहले सपा लगातार चार बार ये सीट जीतती रही। लेकिन 2014 के मोदी लहर में केशव मौर्य ने यहां कमल खिलाया।

अगर बीजेपी यहां हारती है तो इसके राजनीतिक मायने बड़े होंगे। पहला संदेश ये जाएगा कि हिंदी पट्टी में मोदी का जादू अपने चरम पर जा चुका है और अब उतार पर है। दूसरी बात कि बीएसपी-सपा गठबंधन 2019 में बीजेपी को मात दे सकती है और तीसरी बात कि फूलपुर गैर यादव ओबीसी के दबदबे वाला इलाका है, जहां बीजेपी की पैठ मानी जाती है। माना जाएगा कि बीजेपी का ये किला भी दरक रहा है।

बेशक, इनमें से कुछ वोट कांग्रेस भी काटेगी जो सपा-बसपा से अलग है। कांग्रेस के अभय अवस्थी कहते हैं कि “कांग्रेस बड़ी तेजी से उभर कर आई है। भारतीय जनता पार्टी के डिप्टी सीएम ने यहां से लड़ा था और अब वो डिप्टी सीएम हो गए तो उन्होंने ये सीट छोड़ कर अपमान किया। दूसरी तरफ सपा और बसपा है, जो एक नया राजनितिक सन्देश दे रही है।


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