फोटो गैलरी : पी.वी. सिंधु के बैडमिंटन फैन से बैडमिंटन स्टार बनने की कहानी

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वर्ल्ड बैडमिंटन रैंकिंग में 10वें नंबर पर काबिज पी.वी. सिंधु ने नंबर वन खिलाड़ी कारोलिना मारीन को फाइनल मुकाबले में कड़ी टक्कर दी। सिंधु ने 21-19 से पहला सेट अपने नाम किया लेकिन दूसरे और तीसरे सेट में 21-12 और 21-15 से हार कर सिंधु गोल्ड नहीं जीत सकी। सिंधु भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता है। हालांकि ये मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। सिंधु ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया।

फोटो गैलरी :



आइए जानते हैं देश का सिर गर्व से ऊंचा करने वाली पी. वी. सिंधु के एक बैडमिंटन फैन से लेकर एक बैडमिंटन स्टार बनने की कहानी:
पुरसला वेंकट सिंधु का जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में हुआ था। पी.वी. सिंधु ने रियो ओलंपिक में मारीन कारोलीना से बेहद रोमांचक मुकाबले में हार गईं लेकिन उन्होंने सिल्वर जीत कर इतिहास बना दिया।

पी.वी. सिंधु का जीवन:
साल 2011 में सिंधु ने 2001 में ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियन बने पुलेला गोपीचंद से प्रभावित होकर बैडमिंटन खेलने की ठान ली और महज आठ साल की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया। सिंधु ने शुरूआती शिक्षा श्री वेंकटेश्वर बाला कुटीर, गुंटूर से हासिल की थी. पीवी सिंधु के पिता पीवी रमण और माता पी विजया पूर्व वालीबॉल खिलाड़ी हैं।

शुरूआत में सिंधु ने महबूब अली के मार्गदर्शन में बैडमिंटन सीखा:
सिंधु ने सबसे पहले सिकंदराबाद में इंडियन रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूरसंचार के बैडमिंटन कोर्ट में महबूब अली के मार्गदर्शन में बैडमिंटन की बुनियादी बातों को सीखा। इसके बाद वे पुलेला गोपीचंद के गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में शामिल हो गईं। 30 मार्च 2015 को सिंधु को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

कब-कब किया देश का नाम रौशन:

  • साल 2009 में कोलंबो में आयोजित सब जूनियर एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप में सिंधु ने कांस्य पदक जीता।
  • साल 2010 में ईरान फज्र इंटरनेशनल बैडमिंटन चैलेंज के एकल वर्ग में रजत पदक जीता।
  • साल 2010 के थॉमस और यूबर कप के दौरान वे भारत की राष्ट्रीय टीम की सदस्य रहीं।
  • साल 2013 में मलेशिया ओपन ग्रां प्री में भी किया था कमाल।
  • सिंधु ने मलेशिया ओपन ग्रां प्री में गोल्ड मेडल जीता। .
  • बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉज मेडल जीता।
  • मकाउ ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।
  • साल 2013 में भारतीय नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीता और मौजूदा नेशनल चैंपियन हैं।
  • मौजूदा साल में मेक्सिको में आयोजित जूनियर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं।

रियो ओलंपिक में सिंधु का सफर:
इस ओलंपिक में सिंधु ने अपने से ऊपर रैंकिंग की खिलाड़ियों को हराया है. सिंधु ने सेमीफाइनल में नंबर 6 रैंकिंग वाली जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को हराया। वहीं क्वार्टरफाइनल में नंबर दो रैंकिंग वाली चीन की वेंग यिहान को मात दी। बैडमिंटन के खेल की जब जब बात होती थी तो एक ही देश का नाम सुनाई देता था चीन, लेकिन सिंधु के खेल ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत भी किसी से कम नहीं है।

पूरे ओलंपिक में सिंधु सिर्फ एक गेम हारी हैं। बैडमिंटन के एक मैच में तीन गेम होते हैं। सिंधु ने रियो ओलंपिक में अब तक अपने पांचों मैच जीते हैं। इन पांच मैचों में उन्होंने 10 गेम जीते हैं और सिर्फ एक गेम हारी हैं।

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