बैतूल मक़दिस : “फिलिस्तीन के समर्थन में 128 देशों ने की वोटिंग, अमेरिका को मिले केवल 9 वोट”

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि जो भी देश प्रस्ताव के पक्ष में वोट देंगे, उन्हें अमेरिका की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती की जाएगी। उनकी धमकी का कोई खास असर नहीं पड़ा और सिर्फ 9 देशों ने ही प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया और 35 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। ग्वाटेमाला, होंडुरास, इजरायल, मार्शल आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, पलाउ, टोगो और अमेरिका ने प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया।

फिलिस्तीन स्थित बैतूल मुक़द्दस यानी येरुशलम को इज़राईल की राजधानी के के तौर मान्यता देने के खिलाफ पूरी दुनिया खड़ी होगई है,आज संयुक्त राष्ट्र में हुई वोटिंग 128 देशों ने अमेरिका के फैसले के खिलाफ किया वोट है, जबकि 9 देशों ने उसके समर्थन में वोटिंग की है। भारत ने भी UN के प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया है,अमेरिका ने बेबुनियाद और गलत तरीके से दुनिया पर अपने फैसले को थोपने की परम्परा को ये तकड़ा झटका है।

येरुशलम को इसराइल की राजधानी घोषित करने के बाद से डोनाल्ड ट्रम्प की दुनियाभर में काफी आलोचना की जा रही थी, यहाँ तक की कुछ देशों ने इसे ‘बिना सोचे समझे उठाया हुआ कदम’ कहा था वहीँ नार्थ कोरिया के किम जोंग ने डोनाल्ड ट्रम्प को ‘सठिया गये’ शब्दों से उच्चारित किया था.

यूनाइटेड नेशन ने इस मामले को उलझता देख इस पर विश्व की देशों की वोटिंग कराने का फैसला किया था जिसमे अमेरिका की बेहद किरकिरी सामने आई है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पास कर अमेरिका से यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के फैसले को वापस लेने को कहा है। इस प्रस्ताव का भारत समते 128 देशों ने समर्थन किया, जबकि सिर्फ 9 देशों ने ही प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि जो भी देश प्रस्ताव के पक्ष में वोट देंगे, उन्हें अमेरिका की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती की जाएगी। उनकी धमकी का कोई खास असर नहीं पड़ा और सिर्फ 9 देशों ने ही प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया और 35 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। ग्वाटेमाला, होंडुरास, इजरायल, मार्शल आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, पलाउ, टोगो और अमेरिका ने प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने महासभा के प्रस्ताव की आलोचना की है। हेली ने कहा कि अमेरिका इस दिन को याद रखेगा जब एक संप्रभु देश के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की वजह से संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका यरुशलम में अपना दूतावास खोलेगा।

इससे पहले ट्रंप ने जेरूसलम को इजरायल की राजधानी की मान्यता खारिज करने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों को आर्थिक मदद रोकने की धमकी दी थी। ट्रंप ने कहा, ‘ये हमसे अरबों डॉलर की मदद लेते हैं और फिर हमारे खिलाफ मतदान करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम देख रहे हैं। इन्हें हमारे खिलाफ वोटिंग करने दो। हमें इससे फर्क नहीं पड़ता।’


इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश हुआ था, जिस पर अमेरिका ने वीटो कर दिया था। सुरक्षा परिषद के सभी 14 सदस्यों ने इस मसौदे के पक्ष में वोट किया था लेकिन अमेरिका ने वीटो कर दिया था।

गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दशकों पुरानी अमेरिकी नीति के उलट इजरायल की राजधानी के तौर पर जेरूसलम को मान्यता देने की घोषणा की और अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से जेरुसलम स्‍थानांतरित करने का निर्देश भी दिया। ट्रंप के इस कदम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध हुआ इसके बाद अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि अमेरिकी दूतावास को कम-से-कम दो साल तक जेरूसलम नहीं ले जाया जाएगा


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