ब्लॉग : “सुनो औरतों, तुम परिवार के लिए स्टेपनी बनना छोड़ दो…” – पूनम मिर्ची

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चमचमाती कार फर्राटे से दौड़ रही हो और अचानक एक कील उसकी गति को विराम लगा देती है…

फिर याद आती है स्टेपनी की…

जो आड़े वक्त काम आती है और गाड़ी को फिर से गति मिल जाती है।

यही हाल एक औरत की होती है अधिकतर परिवारों में….

तटस्थ जीवन जिए जाती है…

परिवार में जिसे भी ज़रूरत पड़ती है उसका इस्तेमाल स्टेपनी के तौर पर कर लिया जाता है….

पर कभी भी वो सम्मान नहीं मिलता जिसका इंतज़ार वो हमेशा टकटकी लगाए करती रहती है …

हाँ…ये ज़रूर है कि यदि कोई भूल चूक हो जाए तो परिवार का हर व्यक्ति पानी पी पी कर उसे उसकी गलती के लिए बार बार शर्मिन्दा करेगा…..

सुनो! औरतों!!! तुम परिवार के लिए स्टेपनी बनना छोड़ दो…

तुम स्वयं को एक्सीलेटर बनाओ….

जिसके बिना गाड़ी का दौड़ना क्या हिलना भी मुहाल हो जाए…..

हमें तभी इज़्जत मिलेगी जब हम खुद अपनी इज़्जत करेगीं….

इसलिए हर बात के लिए किस्मत को दोष देना बंद करो…

और मुँह में रखी ज़ुबान को अपने लिए भी चलाना सीखो….

जी के अलावा भी कहना आना चाहिए।

सिर्फ महँगे कपड़े और गहनों से स्वयं को सजा कर पेश करना बंद करो।

स्वयं को खोजो…जो कहीं उलझ कर रह गई है जिम्मेदारियों और दूसरों की महत्वाकांक्षाओ को पूरा करते करते।

थोड़ा स्वार्थी बनों खुद के लिए…

थोड़ा समय दो अपनी पसंद को पूरा करने के लिए…

थोड़ा ना कहना सीखो….हर बात पर हामी तुम्हारी परेशानियाँ बढ़ाएगी।

ये ना तुम्हारे उन खास पलों के लिए भी होनी चाहिए जो हमेशा पुरुष साथी द्वारा ही चलायमान होती है….

जब शरीर तुम्हारा है तो उसका इस्तेमाल किसी और की मर्जी से कैसे होगा?

जानती हूँ…बवाल होगा…पर सिर्फ एक बार ही होगा…क्योंकि जब पुरुष साथी ज़ुबान की भाषा ना समझे तो सर्व सुलभ शरीर की ना बहुत कुछ समझा देती है।

सिर्फ सोचना नहीं….करके भी देखना….अच्छा लगेगा…………………..


-पूनम मिर्ची

पूनम मिर्ची

(पूनम लाल सोशल मीडिया पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक लेखनी के लिए जानी जाती हैं। पूनम लाल फेसबुक यूजर हैं और उन्होंने अपने फेसबुक इंट्रो में लिखा है ‘मेरे पास मेरी खुद की #अकड़ बहुत है, इसलिए अपनी अकड़ अपने पास रखो’। यह आलेख हमने उनकी फेसबुक वॉल से लिया है। यह अपने आलेख पूनम मिर्ची के लिखतीं हैं। )


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