भारत सरकार को लगा झटका : “इंटरपोल ने डॉ ज़ाकिर नाईक की गिरफ्तारी पर रेड कॉर्नर जारी करने से किया इनकार”

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नई दिल्ली। इंटरनेशनल आपराधिक पुलिस के द्वारा किसी अपराधी को गिरफ़्तार करने या प्रत्यपर्ण के लिए रेड कॉर्नर जारी करता है। इंटरपोल एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसके द्वारा विभिन्न देशों के बीच सहयोग करके अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को पकड़ती है,भारतीय एजेंसी ने इंटरपोल में ज़ाकिर नाईक के खिलाफ रेड कॉर्नर जारी करने की माँग की थी।

भारतीय एजेंसियों को बड़ा झटका देते हुए इंटरपोल ने इस्लामिक प्रचारक डॉक्टर जाकिर नाईक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है। इंटरपोल के इस फैसले पर जाकिर नाईक ने खुशी जताते हुए कहा है, ‘मुझे ज्यादा खुशी होती अगर भारतीय एजेंसियां भी मुझे आरोपों से मुक्त कर देतीं. वो दिन जल्द ही आएगा.’


इस्लामी स्कालर जाकिर नाइक के खिलाफ जारी किये गए रेड कॉर्नर नोटिस को इंटरपोल ने रद्द कर दिया है। न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक इंटरपोल ने जाकिर नाईक से सभी संबधित कार्यालयों को निर्देश दिया की उनसे संबधित सारे डेटा को हटा दिया जाए । इंटरपोल की रिपोर्ट के मुताबिक जाकिर नाइक के खिलाफ अब तक कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है।


Commission de controle des fichiers de I’O.I.PC-interpol
Commission for the control of interpol’s files
commission de control de los ficheros de la OIPC-INTERPOL

Our ref: ccf/103/r466.17/c607.17
Your ref: pb.mcl.pr445.1
Date 11 Dec 2017

Subject :request concerning Mr zakir Abdul karim naik.

Dear sir,

As provided for in our correspondence dated 6th October 2017, the commission studied your request during its 102 session, which took place from 24-27 October 2017, in accordance with the procedure described in our letter dated 23 June 2017.

After a thorough examination of the elements before it, the commission found that the data challenged raised questions as to compliance with applicable rules. As a result, it considered that the retention of this data in the INTERPOL information system was not compliant with interpol’s rules and decided that it should be deleted. This decision was forwarded to the INTERPOL general secretariat, which deleted the data challenged from INTERPOL’S files on November 2017

Additionally please be advised that the INTERPOL general secretariat has informed all INTERPOL national central bureaus (NCB) that:

In application of the decision made by the commission for the control of the INTERPOL’S files, the general secretariat has deleted the information relating to your client;

All international police cooperation via INTERPOL’S Channels in this case would not be in conformity with INTERPOL’S constitution and rules.

The INTERPOL general secretariat also urged all NCBs to update their national data bases accordingly,as well as to verify that the same is done by all national entities that have access to INTERPOL information.

You will find enclosed the decision of the commission concerning your client and an official letter for the INTERPOL general secretariat, certifying that he is not subject to an INTERPOL red notice of diffusion and that he is not known to its data Bases.

To undertake any measure you deem appropriate for the follow up of your client’s cade at national level, we invite you contact the relevant national authorities.

Your’s faithfully,

Secretariat to commission

for the control of INTERPOL’S files Encl.2
Corker binning

Mr Peter Benning
22 Essex street
London WC2R 3AA
united kingdom ..


इसका मतलब है कि इंटरपोल को मुंबई में एनआईए कोर्ट से पहले दायर चार्जशीट की कॉपी नहीं मिली है। जाकिर नाइक के खिलाफ आरोप आईपीसी और यूएपीए के तहत दायर किए गए हैं। सबूत की कमी का हवाला देते हुए इंटरपोल रिपोर्ट ने डॉ। जाकिर नाइक पर रेड कॉर्नर नोटिस को रद्द कर दिया है ।


To Whom It May Concern

The general secretariat of the international criminal police organization- INTERPOL hereby certifies that, as of today, Mr. Zakir Abdul Karim Naik born on 18th October 1965, is not subject to an INTERPOL red notice or diffusion and is not known in INTERPOL’S databases.

INTERPOL is aware that in the past the individual was subject of data recorded in INTERPOL’S databases, yet the data was later canceled.

Done in Lyon on 1st December 2017

Office of legal affairs general secretariat ISPO-INTERPOL.


जाकिर के खिलाफ NIA की चार्जशीट

वहीं सीबीआई ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. सीबीआई ने कहा कि इस मामले में भारतीय जांच एजेंसी ही कुछ कह सकती है। इंटरपोल ने जाकिर के वकील को खत के जरिए सूचना दी है कि सबूत के अभाव में जाकिर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के आग्रह को रद्द कर दिया गया है।

भारतीय एजेंसियों ने जाकिर के प्रत्यर्पण हेतु इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की दर्ख़्वास्त की थी, ताकि उसे भारत लाया जा सके। बता दें कि भारतीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक आतंकी घटना में जाकिर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

डॉक्टर नाईक के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड विधान की धारा 20 (b), 153 (a), 295 (a), 298 and 505 (2) के तहत आरोप तय किए गए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक जाकिर मलेशिया में शरण लिए हुए है. बांग्लादेश में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों ने जब जाकिर से प्रभावित होने की बात कबूली, तो वो 1 जुलाई, 2016 को भारत से भाग गया। इसके बाद नवंबर, 2016 में जाकिर के खिलाफ केस दर्ज किया गया और दिसंबर, 2016 में जाकिर के एनजीओ को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बैन कर दिया।

NIA ने जाकिर पर देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया है. आतंकी संगठन ISIS में शामिल होने के लिए देश छोड़ने वाले भारतीय युवकों ने भी भारतीय एजेंसियों को बताया था कि वे जाकिर के भाषण से प्रभावित थे. जाकिर नाईक के पीस टीवी को कई देशों में बैन किया गया है.

मलयेशिया में है नाईक
खबरों के अनुसार जाकिर अभी मलयेशिया में है। यहां उसे राजनीतिक शरण मिली हुई है। बांग्लादेश में आतंकी द्वारा जाकिर से प्रभावित होने की स्वीकारोक्ति के बाद जाकिर 1 जुलाई 2016 को भारत से भाग गया था। नवंबर 2016 में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2016 में उसके मुंबई के उसके एनजीओ आईआरएफ पर प्रतिबंध लगा दिया था। जाकिर नाईक का पीस टीवी यूके, कनाडा समेत दुनियाभर के कई देशों में प्रतिबंधित हो चुका है। भारत जल्द ही उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करेगा।

“इंटरपोल के फैसले से खुश हूं, उम्मीद है भारतीय एंजेसियां भी झूठे मामले को हटा देंगी” – जाकिर नाईक

इस्लामी स्कालर डॉ जाकिर नाइक के खिलाफ जारी किये गए रेड कॉर्नर नोटिस को इंटरपोल द्वारा रद्द करने के बाद जाकिर नाइक का बयान आया है। उन्होंने अपने बयान में कहा की ‘मैं इंटरपोल के फैसले से खुश हूं. उम्मीद करता हूं कि भारतीय जांच एंजेसियां भी मुझ पर सारे गलत और झूठे मामले को हटा देगी…’

वही जाकिर नाईक के प्रवक्‍ता ने दावा किया कि इंटरपोल ने माना है कि इस मामले में राजनीतिक और धार्मिक पक्षपात किया गया है. बता दें की इंटरपोल ने डॉक्‍टर नाईक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस को रद्द कर दिया है और दुनियाभर में मौजूद अपने दफ्तरों को उनका डाटा हटाने को कहा है. इंटरपोल ने राजनीतिक और धार्मिक पक्षपात को भी एक वजह बताई है.’


 

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