“मुहम्मद (सल्लाहु अलैहि वस्सल्लम) की सब्र और अखलाक की सुन्नतो को अपनाएँ” – मुहम्मद ज़ाहिद

0
82


मौजूदा भारत में मुसलामानों को बहुत सी परिक्षाएँ देनी हैं जिसमें सब्र और अहिंसक चरित्र की परिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, आप विश्वास कीजिए कि यदि इस दौर में मुसलमान इस परिक्षा में पास हो गया तो देश में मौजूद उनके दुश्मन हार जाएँगे और मुसलामानों के ऊपर पिछले 70 सालों से झूठे इतिहास और झूठे साहित्य के माध्यम से लगाए जा रहे सारे आरोप धुल जाएँगे।

हमारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया ही है कि:

“एक वक्त ऐसा आएगा कि दुनिया तुम पर ऐसे टूट पड़ेगी जैसे भूखे दस्तरख्वान पर टूटते हैं”

शायद वह वक्त आज का ही है जिसे हमारे नबी ने 1400 साल पहले आगाह कर दिया था। तो इस मुश्किल वक्त से निकलने के लिए हमारे पास हमारे नबी की सुन्नतें मौजूद हैं जो आज के दौर के लिए सबसे बेहतरीन व्यवहार का उदाहरण है।

दरअसल वक्त की बात इसलिए कही क्युँकि भारत में होते हर साल 5-7 चुनावों में भाजपा और संघ के कहीं भी जीतते ही उनके गुंडों को यह संदेश मिल जाता है कि वह जो कर रहे हैं उनको जनता का समर्थन मिल गया। और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचारों में वृद्धि हो जाती है।

ध्यान दीजिए कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने से शुरु हुआ यह सिलसिला जब जब भाजपा किसी प्रदेश में हारी तो कम हुआ और जीती तो यह तिव्र गति से बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में जीत के बाद इस गुंडागर्दी और अत्याचार में तिव्र वृद्धि आई है जो अगले किसी विधानसभा चुनाव की हार पर या तो रुकेगी या जीत पर और तिव्र होगी।

मुसलमानों को सब्र से काम लेना चाहिए और कहीं भी इसके विरोध में हिंसक प्रतिक्रिया बिलकुल नहीं देनी चाहिए, मुसलमान पिछले 38 महीने से ऐसा भी कर रहा है और यदि वह शेष 1 साल 10 महीना और सब्र कर ले तो केन्द्र की इस शमशान पसंद सरकार को इनके लोग ही धकिया कर हटा देंगे और यदि मुसलमानों ने हिंसक घटनाएँ कर दीं तो सब गड़बड़ हो जाएगा और यही लोग मुसलमानों के विरोध में मोदी की लाख विफलताओं और उनसे नाराज़गी के बाद भी उनके साथ खड़े हो जाएँगे।

दरअसल यह लोग बहुत शातिर हैं और यह चाहते हैं कि मुसलमान उग्र प्रतिक्रिया दे या गलतियाँ करें जिसका इस्तेमाल यह लोग प्रोपगंडा करके मोदी और अपने पक्ष में कर लें इसीलिए मुसलमानों के द्वारा की गयी बेहद मामूली सी घटनाएँ जैसे मालदा और पश्चिम बंगाल, राष्ट्रीय आपदा बना दी जाती हैं और गुर्जर, जाट, पटेल तथा आनन्द पाल के लिए हुए लाख गुना बड़े हिंसक आंदोलन मामूली घोषित कर दिए जाते हैं।

कारण स्पष्ट है कि एक के हाइलाइट और बढ़ा चढ़ा कर दिखाने से इनको फायदा होता है और दूसरे से नुकसान। मीडिया तो है ही भाँड, वही काम करेगी जो उसके स्टेज का मालिक कहेगा।

एक बात और है, ऐसा नहीं कि आप यदि खामोश और अहिंसक रहे तो यह भी खामोश रहेंगे, यह आपको और हमें उकसाएँगे कि हम हिंसक हों और इनकी विफलता उसी से ढक जाए।

दरअसल कल एक ट्रेन में मुस्लिम परिवार और उसमें एक विकलांग के साथ की गयी मारपीट पर बीबीसी हिन्दी ने अपने पेज पर इसी खबर पर पोस्ट शेयर की वहाँ कुछ मुसलमान उग्र प्रतिक्रिया दे रहे थे तो कुछ लोग (?) उनको भड़का रहे थे कि:

“मुसलमान भी बड़े उतिया हैं, अरे चाकू, गड़ासा, गुप्थी लेकर चलें जब यात्रा कर रहे हों तो और ऐसे लोगों की अँतड़ियाँ बाहर निकाल दें, जब मरना ही है तो दो चार को मर कर मरें”

ऐसी भड़काने वाली प्रतिक्रियाओं से सावधान रहने की आवश्यकता है, यह साजिश करके भड़काई जा रही हैं, सोशल मीडिया पर, ग्रुप में, व्हाट्स अप ग्रुप में, मुस्लिम नाम की फेक आईडी से या निजी तौर पर भी ऐसी किसी भी भड़काऊ प्रतिक्रिया पर मुसलमान ध्यान ना दे तो वह 2019 में जीत जाएगा।

और महत्वपूर्ण बात यह है कि वह लोग उकसाने का भरपूर प्रयास करेंगे और 2019 तक करते ही रहेंगे, कहीं मस्जिद से खींच कर थप्पड़ मारेंगे तो कभी ट्रेन में परिवार के साथ मारपीट करेंगे, और खुद वीडियो बना कर आपको आक्रोशित करने का प्रयास करेंगे कि आप उग्र और हिंसक प्रतिक्रिया दो जिससे केन्द्र सरकार के प्रति उभर रहा गुस्सा आपके प्रति पैदा की गयी नफरतों में दब जाए।

आपको पता ही होगा कि भक्तों के निशाने पर इस समय सोशलमीडिया पर उनके ही दो प्रमुख लोग हैं, एक हैं गृहमंत्री राजनाथ सिंह तो दूसरे वित्त और रक्षामंत्री अरुण जेटली। मुसलमान यदि अहिंसक और शांत रहा तो अब अगला नंबर मोदी का है और यह होकर रहेगा।

इसलिए सबसे अनुरोध है कि शांत रहें, डरें नहीं और डर कर कोई भी गैरकानूनी काम ना करें, ना किसी के भड़काने में आएँ ना उकसाने में और ना ही अपशब्दों का प्रयोग करें। विरोध प्रदर्शन करिए तो अहिंसक जैसे दो दिन पूर्व मऊ और ईद के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहा है।

यह बहुत शातिर हैं, इनके पास नागपुर में बैठे बहुत शातिर थिंकटैंक हैं और इनको पता है कि जैसे राजा की जान तोते में थी वैसे ही इनकी जान मुसलमानों में है।

मुसलमानों का अहिंसक, स्वस्थ भाषा और शांतिपुर्ण व्यवहार 2019 में इनके लिए काल बन जाएगा।

मुसलमानों के भड़काऊ बयान वीर नेताओं को भी यह बात समझ लेनी चाहिए कि अब तक उनके मुँह से उगले किसी भी भड़काऊ बयान से आज तक मुसलमानों का कोई फायदा नहीं हुई है, हाँ उनके ऐसे वीडियो संघी घर घर दिखा कर अपने नाराज़ वोटों का ध्रुवीकरण अवश्य कर लेते हैं।

बहुत ही परिपक्व, अहिंसक और शांत व्यवहार की आवश्यकता है जैसे पिछले 3 साल 2 महीने से करते आए हैं। किसी भी असंवैधानिक और गैरकानूनी कार्य से दूर रहें और किसी के भड़काने और उकसाने में ना आएँ।

नबी की सब्र और अखलाक की सुन्नतो को अपनाएँ और उसी का एक रूप है “गाँधीगिरी” अर्थात जो आपके प्रति नफरत करता है उसका अपने व्यवहार से दिल जीतना।

इन शातिरबाजों से ऐसे ही लड़ कर जीता जा सकता है खुद कमेन्ट बाक्स में देखिए कि कैसे आपको उकसाया और भड़काया जाएगा।


-मुहम्मद ज़ाहिद

मुहम्मद ज़ाहिद

मुहम्मद ज़ाहिद

(मोहम्मद जाहिद मीडिया एक्टिविस्ट हैं, इनकी लेखनी बेबाक है। मुहम्मद ज़ाहिद फेसबुक यूज़र हैं। मुहम्मद ज़ाहिद की एक वेबसाइट भी है जिसका नाम www.mohdzahid.com है। यह लेख उनकी फेसबुक की टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


Facebook Comments

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz