“मैंने विधिवत आयकर रिटर्न घोषित किया है, फंड का कोई गलत इस्तेमाल नहीं किया, हर पैसे का हिसाब दिया है” – डॉ. ज़ाक़िर नाइक

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अपने बयानों से ढाका के हमलावरों को प्रेरित करने का आरोप झेल रहे डॉ जाकिर नाइक ने कहा कि जो भी व्यक्ति हिंसा का मार्ग चुनता है वह इस्लामिक नहीं रहता। वह ऐसे किसी व्यक्ति का समर्थन नहीं करते। “यह कहना बेहद गलत है कि ढाका के हमलावर मुझसे प्रेरित थे। अगर मैं हकीक़त में आतंक की पैरवी कर रहा होता तो अब तक लाखों लोग आतंकवादी बन चुके होते सिर्फ चंद लोग नहीं।”

“लाखों समर्थकों के बीच कुछ चुनिन्दा भटके हुए लोग हो सकते हैं जो हिंसा का मार्ग चुन लें। लेकिन ऐसा तब ही होगा जब वह मेरी सीख को नहीं मान रहे होंगे। जिसपल वो हिंसा का मार्ग चुनते हैं वे इस्लामिक नहीं रहते और यकीनन वो मेरे समर्थन के लायक नहीं रहते।” नाइक ने एक ईमेल इंटरव्यू में पीटीआई को बताया।

उनकी संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर प्रतिबन्ध के खिलाफ उनके कानूनी क़दमों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दिल्ली और मुंबई में मौजूद उनकी कानूनी टीम इस मामले को देख रही है और जल्द ही कोर्ट जायेगी।

केंद्र सरकार ने हाल ही में आईआरऍफ़ को एक गैर-कानूनी संगठन घोषित करते हुए इस पर पांच साल के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है। नाइक ने प्रतिबन्ध के फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है।

विदेशों से प्राप्त धन में आईआरएफ द्वारा काले धन को वैध करने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि जिन 47 करोड़ रुपये से अधिक पर सवाल उठाया जा रह है वह पिछले छह वर्षों में दुबई के उनके निजी खाते में मुंबई के उनके निजी खाते में आया है।

“इस धन को मैंने विधिवत रीटर्न में घोषित किया है और मेरे परिवार के सदस्यों को उपहार और कर्ज देने सहित अन्य वैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया था। मैं नहीं जानता कि इसमें समस्या कहाँ है।

“आईआरएफ ने पिछले 15 वर्षों में एफसीआरए खाते में लगभग 14 करोड़ रुपये प्राप्त किया है। इसमें से 4 करोड़ रुपये विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों ने दिया था। पिछले 15 साल में केवल 10 करोड़ रुपये विदेशी दानदाताओं से प्राप्त किया गया था। इस सब कि जानकारी मात्रा, नाम और दानदाताओं के पते के साथ विधिवत तरीके से गृह मंत्रालय को घोषित की गयी थी। तब, यहां काले धन को वैध करने का सवाल कहाँ से आया है?“, नाइक ने पूछा।

भारत नहीं लौटने का कारण पूछने पर नाइक ने कहा कि उन्होंने बार-बार जांच में सरकारी एजेंसियों को सहयोग की पेशकश की है, लेकिन अब उनसे सवाल पूछने के लिए, या कोई नोटिस भेजने के लिए किसी एजेंसी ने उनसे संपर्क नहीं किया है।


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