राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा ने खेला दलित कार्ड : “आडवाणी, जोशी, सुषमा हाशिये पर, बिहार के राज्यपाल और ‘दलित’ रामनाथ कोविंद होंगे भाजपा के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार”

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नई दिल्‍ली। राष्‍ट्रपति चुनाव को लेकर बीते कई दिनों से चल रही कवायद के बाद सोमवार को बीजेपी अध्यक्ष ने अपने पत्ते खोल दिए. एनडीए ने बिहार के राज्‍यपाल रामनाथ कोविंद को अपना उम्मीदवार बनाया है और ऐसा करके उसने एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की है. रामनाथ कोविंद की छवि बेहद शांत और संजीदा किस्म के राजनेता के तौर पर रही है साथ ही दलित समुदाय से आने की वजह से उनका विरोध करना विपक्ष के लिए भी आसान नहीं होगा जबतक कि वे कोई बेहतर विकल्प नहीं ढूंढ लेते. रामनाथ कोविंद दिल्‍ली पहुंच चुके हैं जहां वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. इस मामले में विपक्ष से जो बयान आ रहे हैं उससे ये लग रहा है कि विपक्ष को ज़रा भी अंदेशा नहीं था कि इस तरह से, इतनी जल्दी NDA नाम का ऐलान कर देगा. ये भी तय लग रहा है कि विपक्ष भी अपना उम्मीदवार उतारेगा.

भाजपा ने रामनाथ कोविंद को अपनी पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है। इस बात के एलान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को किया। बता दें कि रामनाथ कोविंद अभी बिहार के राज्यपाल हैं।

आज भाजपा पार्टी मुख्यालय में संसदीय दल की बैठक चल रही थी जिसके बाद यह फैसला लिया गया। इस बैठक में राष्ट्रपति चुनाव और उम्मीदवार पर लंबी चर्चा हुई।

इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी समेत संसदीय बोर्ड के अन्य सदस्य मौजूद थे।

इससे पहले अटकले लगाई जा रही थी कि भाजपा के तरफ से पार्टी के किसी बड़े नेता को इस पद का प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इनको लेकर लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी लिया जा रहा था।लेकिन अभी जिस तरह से रामनाथ कोविंद का नाम सामने आया है वो सारे अटकलों के विपरीत है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी की संसदीय दल की लगभग दो घंटे चली बैठक के बाद कहा, ‘हमने फैसला किया है कि रामनाथ कोविंद राजग की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार होंगे.’ इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे. उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए लंबे समय से राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा कर रहे थे.

शाह ने संवाददाताओं को बताया, ‘भाजपा ने सभी राजनीतिक दलों और समाज के कई वर्गों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की. चर्चा के बाद उम्मीदवारों की एक लंबी सूची तैयार की गई, जिसपर पार्टी की संसदीय दल की बैठक में चर्चा हुई.’

कोविंद (72) 23 जून को अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यदि वह चुनाव जीतते हैं तो आर. के. नारायणन के बाद दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे. कोविंद के नाम की घोषणा से पहले सुषमा स्वराज और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन सहित कई नेताओं के नाम पर चर्चा हुई.

शाह ने कहा कि एनडीए के सहयोगी दलों को कोविंद की उम्मीदवारी से वाकिफ करा दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य नेताओं से एनडीए उम्मीदवार के बारे में बात की.

मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (बीजद), तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (टीआरएस) और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (तेदेपा) से भी बात की.

भाजपा के वरिष्ठ नेता एम. वेंकैया नायडू ने पार्टी के दिग्गज नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से भी बात की.

अमित शाह ने कहा, ‘रामनाथ दलित परिवार से आते हैं और उन्होंने बहुत संघर्ष किया है. हमें उम्मीद है कि उन्हें चुनाव में सभी का समर्थन मिलेगा.’ उन्होंने कहा कि कोविंद ने दलितों और गरीबों के लिए काफी काम किया है.

पेशे से वकील कोविंद मई 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सत्ता में आने के बाद से पिछले दो वर्षों से बिहार के राज्यपाल हैं. वह भाजपा की दलित इकाई का भी नेतृत्व कर चुके हैं. वह 12 वर्षों तक राज्यसभा सांसद रहे और कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे. वह उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर चुके हैं.

रामनाथ कोविंद सियासत के अलावा अदालत में भी खेल चुके हैं लंबी पारी:
रामनाथ कोविंद का जन्‍म 1 अक्‍टूबर 1945 को देश के सबसे बड़े राज्‍य उत्‍तरप्रदेश के कानपुर जिले के परौंख गांव में हुआ था. अध्‍ययन में बचपन से ही मेधावी रहे कोविंद बीजेपी में कई पदों पर रहने के अलावा हाईकोर्ट में वकालत कर चुके हैं. वे सुप्रीम कोर्ट में भी केंद्र सरकार के वकील भी रह चुके हैं. वर्ष 2015 से वे बिहार के राज्‍यपाल का पद संभाल रहे हैं. कोविंद करीब 16 वर्ष तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर चुके हैं.


एक नजर में रामनाथ कोविंद
जन्‍म: एक अक्‍टूबर, 1945
जन्‍म स्‍थान: गांव परौंख, जिला कानपुर
शैक्षणिक योग्‍यता: एलएलबी
पेशा: वकालत और राजनीति


स्‍नातक डिग्री हासिल करने के बाद सिविल सर्विसेस परीक्षा दी. पहले और दूसरे प्रयास में नाकाम रहने के बाद तीसरी बार में उन्‍होंने कामयाबी हासिल की. कोविंद ने आईएएस जॉब इसलिए ठुकरा दिया क्‍योंकि मुख्‍य सेवा के बजाय उनका एलाइड सेवा में चयन हुआ था. वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बादवे तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव भी रहे. बाद में वे बीजेपी से जुड़े. पार्टी की टिकट से वे दो बार चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन दुर्भाग्‍य से दोनों ही बार उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा.

कोविंद वर्ष 1991 में बीजेपी में शामिल हुए. उच्‍च सदन राज्‍यसभा में 12 वर्ष तक कोविंद बीजेपी का प्रतिनिधित्‍व कर चुके हैं. वे वर्ष 1994 में पहली बार राज्‍यसभा के लिए चुने गए थे. पार्टी के प्रवक्‍ता का पद भी उन्‍होंने संभाला है. कोविंद बीजेपी के दलित मोर्चे के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं. कुष्‍ठ रोगियों के लिए काम करने वाली संस्‍था दिव्‍य प्रेम सेवा मिशन के कोविंद संरक्षक हैं. कोविंद के परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री है.


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