लघु कथा : “मैं भारत का मुसलमान हूँ……………।” – मुहम्मद मंसूर आलम

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फेसबुक ने मेरा इंट्रो पूछा……..

मन किया यह सब कह दूं……….

लेकिन उसने माफ़ी मांग ली…..कहने लगा इतना के लिए जगह नहीं है……..

इसलिए आप सुन लो मैं कौन हूँ………

मैं कौन हूँ………………………………………..?

निहत्था, निरीह, बेजान, बेबस………………………।

मैं मुसलमान हूँ भारत का……………………………।

कभी गुजरात होता है मेरे लिए, कभी भागलपुर, कभी मेरठ तो कभी मुज़फ्फरनगर……………..।

मेरा मसीहा कभी नेहरु थे, कभी मुलायम हुए, कभी मैंने लालू पर सब कुछ न्योछावर किया……।

मैं लोगों की नज़र में आतंकवादी हूँ………….

पेलेट गन का शिकार हूँ………………………

जेल मेरी क़िस्मत है…………………………..

पिछड़ापन मेरा नसीब………………………………….।

मैं भारत का मुस्लमान हूँ…………………….।

मैं टीपू की संतान हूँ………….

ज़फर का जानशीन हूँ…………………

अशफाकुल्लाह का रिश्तेदार हूँ……………..

आज़ाद का ख्वाब हूँ…………………………

मैं ए. पी. जे. कलाम हूँ………………………………..।

मैं वोटर हूँ………………….

किंग मेकर हूँ…………………….

भारत की शान हूँ…………………………..

भारतीय संविधान की आन हूँ……………………………..।

मैं कौन हूँ………………………………………………………?

मैं भारत का मुसलमान हूँ……………।

-मुहम्मद मंसूर आलम

मुहम्मद मंसूर आलम
मुहम्मद मंसूर आलम

(मुहम्मद मंसूर आलम फेसबुक यूज़र हैं। यह लेख उनकी टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzaviya.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzaviya.com@gmail.com भेजें।)

 

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