वीडियो : “अगर आप इस्लाम को मज़बूती से पकड़ना चाहते हैं तो अल्लाह हमेशा आपकी हर मोड़ पर मदद करता है” – नव मुस्लिमा

0
77


आज मैं आपको बताने वाली हूँ की एक ऐसी महिला जिसने किसी अन्य धर्म से इस्लाम में शिरकत की है उसके सामने हिजाब पहनने पर क्या क्या बदलाव आते हैं।

जैसा की मुझे लगता है की एक नए मुस्लिम और एक पैदाइशी मुस्लिम में कुछ न कुछ फर्क होता है। अगर आप एक पैदाइशी मुसलमान है तो आपके लिए ये आसान होता है की आप हिजाब पहनते है क्यूंकि आप अपने बचपन से ही हिजाब पहनते आ रहे है। आपकी माँ पहनती है हिजाब आपकी बहन पहनती हैं। तो ऐसा कहा जा सकता है की आपके आस पास ऐसा ही एक माहौल बन जाता है। और लोग आपको जानते है की ये लड़की हमेशा से ही हिजाब पहनती है तो इसमें कोई नई बात नहीं होती है।

दूसरी तरफ एक अन्य धर्म से इस्लाम में आए इंसान की बात करें तो उस इंसान के साथ ऐसा कम ही होता है की वो हिजाब को और उसके मतलब को जानती हो।

अगर मैं अपनी बात करूँ तो मैंने 19 साल की उम्र तक कभी भी किसी को हिजाब में नहीं देखा था। और जब मैं यूके आई तब मैंने यहाँ देखा की लोग हिजाब में कैसे लगते है। मेरे लिए किसी को हिजाब में देखना बहुत नई चीज़ थी। मैंने सुना था की महिलाऐं हिजाब पहनती हैं, मैंने टेलीविज़न पर देखा था की महिलाऐं हिजाब पहनती हैं, लेकिन मैंने असलियत में कभी किसी को हिजाब में नहीं देखा था।

मुझको ज़रा भी इस बात का पता नहीं था की हिजाब क्या होता है और इसको किस लिए पहना जाता था। तो मुझको ऐसा लगता है की ऐसा इंसान जो की किसी अन्य धर्म से इस्लाम में आया हो तो उसके लिए हिजाब एक नया अनुभव होता है।

मुझको ऐसा लगता है की जहा तक शायद एक हज़ार में से एक इंसान ऐसा होता होगा जिसने की इस्लाम क़ुबूल किया और वो सभी चीज़ो से संतुष्ट है। लोगों के साथ तो ऐसा होता है की उनके खुद के माता पिता ही उनके खिलाफ हो जाते हैं। आप अपने घर में अपने कमरे में जैसे चाहे इबादत कर सकते है, लेकिन बहार सबके सामने दिखाना की आप हिजाब पहनते हो आप एक मुसलमान हो तो ये एक ऐसी चीज़ है की आपको लोगों को झेलना होगा।

मैंने अपना पहला शहादह अपने कमरे में अकेले पढ़ा था और उस समय मैंने अपनी ज़बान से भी नहीं सिर्फ अपने दिल में ही पढ़ा था। मैंने ये पढ़ा था और सुना भी था की शहादह दिल से पढ़ना ज़्यादा ज़रूरी है।

और फिर उसकी अगली सुबह मैं उठी और तभी मैंने सोचा की आज से मुझको हिजाब पहनना चाहिए। तभी मैं उठी पर मुझको बिलकुल भी नहीं पता था की कैसे हिजाब पहनते है। तब मेरे पास एक सर्दी में पहनने वाली शाल थी मैंने उसको ही उठाया और लपेट लिया। मुझको नहीं पता था क्यूंकि मेरी कोई भी दोस्त नहीं थी जो मुझको बता सके की कैसे हिजाब पहनना है।

जब मैं हिजाब पहन कर अपने अपार्टमेंट से निकली तब मैं यह देख सकटती थी की कैसे सब मुझको घूर रहे थे। अब मुझको पांच साल हो गए हैं तो अब मुझको किसी भी तरह परेशानी नहीं होती है। अब सब मुझसे बात करते हैं और मैं भी उनसे बात करती हूँ। कोई भी परेशानी नहीं है अब।

जब मैंने पहली बार हिजाब पहना था तब मैं एक रेस्टोरेंट में काम करती थी तो वहां मुझको हिजाब उतारना पड़ता था। और मैं नहीं चाहती थी की इस्लाम को इस तरह दिखाया जाए की लोग मुझको बोले की तुम पार्ट टाइमर मुसलमान हो क्या?

तो मैंने वो नौकरी छोड़ दी। और अब मैं एक कॉफ़ी शॉप पर काम करती हूँ और वहां मुझको हिजाब पहनने में कोई भी परेशानी है। मैं जिस जगह काम कर रही हूँ वह एक बहुत अच्छे पोजीशन की जॉब है।

मुझको ऐसा लगता है की अगर आप चाह रहे हो इस्लाम को मज़बूती से पकड़ना और इस्लाम के लिए आप बुराई को छोड़ अच्छे को चुन रहे हो तो अल्लाह हमेशा आपके साथ रहता है। और अल्लाह आपकी हर मोड़ पर मदद करता है।


Facebook Comments

NO COMMENTS