शीतकालीन सत्र के पहले दिन : “मोदी सरकार का फैसला, ट्रिपल तलाक बिल को दी मंजूरी”

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नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने आज विवादास्पद ‘तीन तलाक’ पर प्रतिबन्ध लगाने के बिल को आज मंजूरी दे दी है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने उस विधेयक को मंजूरी दी है जिसे संसद की शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। शीतकालीन सत्र आज शुरू हो गया है यह जानकारी सूत्रों द्वारा दी गई है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल अगस्त में अपने एक फैसले में एक साथ तीन तलाक देने के तरीके को गैर इस्लामी और असंवैधानिक करार देकर उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुप्रीमकोर्ट का यह फैसला इस्लाम हिन्दूवाद, ईसाई धर्म, सिखवाद और मजूसी विश्वासों से संबंध रखने वले पांच न्यायाधीशों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुनाया था।

यह निर्णय उस समय सामने आया जब एक से अधिक मुस्लिम महिलाओं की ओर से तीन तलाक के खिलाफ अर्जी दायर की गई थी। भारत सरकार ने पिछले महीने कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए कानून बनाएंगे, क्योंकि यह न्यायिक कार्यवाही के बाद भी तलाक का सिलसिला लगातार जारी है। सरकार ने कहा कि तीन तलाक देने से वैसे भी महिलाओं के मूल अधिकारों का उल्लंघन होता है।

ट्रिपल तलाक बिल पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है। अब इस बिल को कानूनी शक्ल देने के लिए दोनों सदनों में पास कराया जाएगा। 15 दिसंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में इसे पेश किया जाएगा। यह सत्र 5 जनवरी को खत्म होगा। केंद्र सरकार की ओर से तैयार विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा हो सकती है।

किसी भी स्वरूप में दिया गया ट्रिपल तलाक (मौखिक, लिखित या इलैक्ट्रोनिक) गैर कानूनी माना जाएगा। अगर किसी महिला को ट्रिपल तलाक दिया जाता है तो वह महिला खुद और अपने नाबालिग बच्चों के लिए मजिस्ट्रेट से भरण-पोषण व गुजारा-भत्ते की मांग कर सकती है। कितना गुजारा-भत्ता देना है यह मजिस्ट्रेट तय करेगा। नाबालिग बच्चों की कस्टडी के लिए भी पीड़ित मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकती है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ‘मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल’ के ड्राफ्ट को इंटर-मिनिस्टर ग्रुप द्वारा तैयार किया गया है, जिसका नेतृत्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था।

जानें इस कानून की खास बातें:

  • इस कानून के तहत, किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.
  • यह मसौदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है. इस में अन्य सदस्य विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी थे.
  • प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या ‘तलाक ए बिद्दत’ पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने तथा नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा.
  • इसके तहत पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है और मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे.
  • मसौदा कानून के तहत, किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.
  • मसौदा कानून के अनुसार, एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी और शून्य होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है. यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा.
  • प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होना है.
  • तलाक और विवाह का विषय संविधान की समवर्ती सूची में आता है और सरकार आपातकालीन स्थिति में इस पर कानून बनाने में सक्षम है, लेकिन सरकारिया आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्यों से सलाह करने का फैसला किया.
  • पिछले दिनों गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह भारत के लोगों की मजबूत इच्छा है कि संसद तीन तलाक और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग इन दोनों मुद्दों पर कानून बनाए और सरकार इस इच्छा को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

 

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