“संघियों!!! अमरनाथ श्रृद्धालुओं से पूछो काश्मीरी मुसलमानों की मानवता………..” – मुहम्मद ज़ाहिद

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अमरनाथ यात्रा पर जैसे कोई ग्रहण लग गया है, पिछले दिनों श्रृद्धालुओं से भरी एक बस पर फायरिंग हुई और 7 श्रृद्धालु मारे गये तो कल एक बस 300 फिट नीचे खाई में गिर गयी, 17 श्रृद्धालुओं के मारे जाने की खबर है और 39 लोग घायल हुए हैं।

मारे गये सभी श्रृद्धालुओं के प्रति विनम्र श्रृद्धांजलि………..।

धार्मिक कार्य में कोई भी मरता हो तो बेहद दुख होता है, चाहे मक्का में हो या संगम या अमरनाथ यात्रा में……।

पिछले दिनों मक्का में भी हाजियों पर क्रेन गिर गयी थी, सैकड़ों की संख्या में हज को गये लोगों की मृत्यु हो गयी थी।

अमरनाथ यात्रियों के दुर्घटना में मारे जाने को लगभग 20 घंटे हो चुके हैं और अच्छी बात यह है कि किसी ने भी हज यात्रियों के मारे जाने के समय की तरह ना तो खुशी ज़ाहिर की ना तो गिनती बताई कि इतने “बाबा श्रृद्धालु” सीधे बाबा तक पहुँच गये, जैसा कि हज की दुर्घटना के समय हाजियों की मृत्यु पर नागपुरी संतरों ने जश्न मनाया था और धरती पर कुछ बोझ कम होने की खुशी मनाई थी, “शांतिदूत अल्लाह को प्यारे हो गये” कह कर कटाक्ष किया था।

सोचिएगा कि किसके हृदय में ज़हर भरा है, पूरे फेसबुक पर मुसलमान इस दुर्घटना पर शोक व्यक्त कर रहा है और कुछ दिनों पूर्व बस पर हुई फायरिंग पर सड़क पर उतर कर शोक मना रहा था विरोध कर रहा था।

सोचिएगा, और यह भी सोचिएगा कि जब कल बस खाई में गिरी तो बस से 16 लाशों को निकालने वाले और 39 घायलों को सबसे पहले मदद पहुँचाने वाले कौन थे……………….?

वही स्थानीय काश्मीरी मुसलमान……………….।

जिनको पिछले 30 सालों से छलनी किया जा रहा है, कोनोन पोशपुरा किया जा रहा है……………..।

जिनके शाम होते ही घर के दरवाजे बंद हो जाते हैं तो अंधेरे में उनकी एक आहट पर उनके शरीर पर पूरी मैगज़ीन खाली कर देती है………………।

फिर आतंकवादी मारे गये की ब्रेकिंग न्यूज़ चला दी जाती है, देश मान लेता है और गालियाँ देता है, यह भी नहीं सोचता कि कहीं वह किसी काम से अँधेरे में निकला बेकसूर काश्मीरी मुसलमान तो नहीं…………..?

यही काश्मीरी मुसलमान घरों के बंद दरवाज़ो के अंदर पिछले तीस सालों में इन काश्मीरियों की एक पीढ़ी जवान हो गयी तो एक पीढ़ी बूढ़ी हो गयी और एक पीढ़ी मर खप गयी……………..।

जिनके लिए इस देश के लोगों के पास ना तो संवेदना है ना प्रेम, बस ज़मीन के एक टुकड़े को पाने के लिए हर वह काम किया जा रहा है जिससे आम काश्मीरियों की ज़िन्दगी जहन्नुम बन जाए……………….।

समस्याएँ, मणीपुर, नागलैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भी हैं, इन क्षेत्रों में चीन का सीधा दखल है, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश को तो चीन भारत का हिस्सा मानता ही नहीं परन्तु वहाँ काश्मीर जैसी कार्रवाई आपको नहीं दिखेगी, ना ही दिखेगी मीडिया रिपोर्ट और देश भर में इन क्षेत्र के लोगों को काश्मीरी बनाने की कोशिशें…………..।

जानते हैं क्युँ…………………..?

क्युँकि काश्मीर में भारत की राजनीति में लाभ के दो उत्प्रेरक मौजूद हैं, एक मुसलमान…… तो दूसरा पाकिस्तान…….।

इनके प्रति जितनी घृणा देश में फैलाई जाएगी संघ और भाजपा अपने पक्ष में अपने वोटरों का ध्रुवीकरण करने में सफल होगी। और ऐसे ध्रुवीकरण से सरकार की विफलताओं पर से लोगों का ध्यान हट जाएगा………….।

काश्मीर इसीलिए मोदी सरकार बनने के बाद और अशांत हुआ, सरकार द्वारा लगातार ऐसी कार्रवाई की गयी जिससे वहाँ हिंसा भड़के और कुछ लोग मारे जाएँ…………….।

दरअसल मुसलमानों की गिरती लाशें इस देश में कुछ लोगों को सुकून देती हैं और मुसलमान यदि काश्मीरी हुआ तो फिर क्या कहने, बिना अदालती आदेश के वह तो आतंकवादी माना ही जा चुका है…………..।

काश्मीरियों के करीब जाइए, उनके दर्द को समझिए तो रो पड़ेंगे………………।

बहुत पहले एक काश्मीरी से मिला था, शाल बेचने आया था, यहीं कहीं उसे कोई अपना कमरा किराए पर नहीं दे रहा था, बहुत मुश्किल से कहीं छुप कर रह रहा था तो कोई उससे शाल खरीद नहीं रहा था, मुझसे बोला कि दो शाल लेलो तो मेरे पास दो दिन खाने के पैसे हो जाएँगे……………….।

बात की तो फट पड़ा……………………………………………..।

“चरारे शरीफ और हज़रतबल दरगाह” पर हमला पाकिस्तानी आतंकवादियों ने किया था काश्मीरियों ने नहीं, ऐसी दरगाहें जो काश्मीरियों के लिए इबादत की जगह हो वहाँ कोई ऐसा क्युँ करेगा………….?

रूबिया सईद का अपहरण भी पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ही किया था किसी काश्मीरी मुसलमान ने नहीं तो उसके बदले क्युँ छोड़ा आतंकवादियों को भारत ने………..?

कंधार का विमान अपहरण भी पाकिस्तानी आतंकवादियों ने किया था तो विमान के यात्रियों को छुड़ाने के लिए भारत ने खूँखार आतंकवादियों को क्युँ छोड़ा……………?

और पाकिस्तान की शह पर यह सब छोड़े गये आतंकवादी कोई आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे तो गोली खाएं काश्मीरी मुसलमान……………….?

इस आतंकवाद से काश्मीरी मुसलमान क्या पीड़ित नहीं……………….?

क्या काश्मीरी मुसलमान मारे नहीं जा रहे हैं……………………?

क्या मुस्लिम महिलाओं का बलात्कार नहीं हो रहा………..?

तो फिर भारत ने घाटी से सिर्फ़ काश्मीरी पंडितों को ही क्युँ निकाला………………..?

हमको भी निकालते, शेष भारत में हमको भी इज्जत के साथ रहने देते, जगह, पेन्शन और सहानुभूति देते जो 204 काश्मीरी पंडितों की हत्या पर पूरे काश्मीरी पंडितों को वहाँ की मुसीबत भरी ज़िन्दगी से निकाल कर दिया जा रहा तो लाखों की संख्या में मारे गये काश्मीरी मुसलमानों के बावजूद हम मुस्लिम काश्मीरियों को यह सब क्युँ नहीं दिया गया…………….?

हमें दी गयीं गोलियां, घरों में तलाशी के नाम पर हमारे घर की औरतों के साथ बत्तीमिज़ियाँ, और तमाम जगहों पर ज़ोर ज़बरदस्ती, कोनोन पोशपुरा जैसी सैकड़ों वारदातें हैं जो छिपा दी जाती हैं, शायद ही काश्मीर का कोई घर ऐसा हो जहाँ उनके घर के 2-4 लोग ना मरे हों, कौन बर्दाश्त करेगा यह सब………….?

पत्थर ही मारेगा, पत्थर मारना काश्मीरी की पीड़ा है, एक एक पत्थर उसके अंदर के गुस्से और दर्द को बयान करते हैं……”

कल की अमरनाथ यात्रियों की मदद करती तस्वीरें देख कर सहसा वो काश्मीरी याद आ गया, सोचा इतनी ज़िन्दा शिकायतों के बाद भी वहाँ के लोगों के अंदर मानवता ज़िन्दा है…………….।

ज़रूर कुछ कमी हमारी भी है………..।

सोचिएगा……………………..।

……………और सोचिएगा कि वेतनभोगी सेना की बाढ़ में मदद करने पर तंज़ मारने वालों कि काश्मीरी मुसलमानों ने उस कर्ज़ को कहीं उतार तो नहीं दिया………………..?


-मुहम्मद ज़ाहिद

मुहम्मद ज़ाहिद

मुहम्मद ज़ाहिद

(मोहम्मद जाहिद मीडिया एक्टिविस्ट हैं, इनकी लेखनी बेबाक है। मुहम्मद ज़ाहिद फेसबुक यूज़र हैं। मुहम्मद ज़ाहिद की एक वेबसाइट भी है जिसका नाम www.mohdzahid.com है। यह लेख उनकी फेसबुक की टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


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