संसद में तीन तलाक़ : “20 लाख महिलाओं को बगैर तलाक के ही छोड़ दिया गया, जिनमें गुजरात में एक हमारी भाभी भी हैं” – असद उद्दीन ओवैसी

0
72


नई दिल्ली। केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरूवार को तीन तलाक पर विधेयक संसद में पेश किया, इस दौरान इस बिल पर बहस भी हुई। लोकसभा में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलेमीन के सांसद असद औवेसी ने इस बिल पर सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि इस बिल में विरोधाभास हैं।

उन्होंने कहा कि संसद को इस मसले पर क़ानून बनाने का कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है क्योंकि यह विधेयक मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही तलाक-ए-बिद्दत को रद्द कर दिया है.

पहले से ही है कानून:
हैदराबाद से लोकसभा सांसद असद औवेसी ने कहा कि देश में पहले से ही क़ानून हैं, घरेलू हिंसा निवारण अधिनियम है, आईपीसी है. आप वैसे ही काम को फिर से अपराध घोषित नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि इस विधेयक में विरोधाभास हैं. ये बिल कहता है कि जब पति को जेल भेज दिया जाएगा, तब भी सहवास का अधिकार बना रहेगा. उसे भत्ता देना होगा.

उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि ये कैसे संभव है कि जो आदमी जेल में हो और भत्ता भी अदा करे. आप कैसा क़ानून बना रहे हैं. औवेसी ने कहा कि मंत्री जी ने शुरुआत में ही कहा कि बिल पर मशविरा नहीं किया गया है. अगर ये विधेयक पारित हो जाता है तो मुस्लिम महिलाओं के साथ नाइंसाफ़ी होगी. लोग अपनी पत्नियों को छोड़ देंगे।

गुजरात में हमारी भाभी हैं:
असद औवेसी ने पीएम मोदी का नाम लिये बगैर उन पर भी निशाना साधा, उन्होंने कहा कि देश में 20 लाख ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें उनके पतियों ने छोड़ दिया है और वो मुसलमान नहीं हैं. औवेसी ने कहा कि उनके लिए क़ानून बनाए जाने की ज़रूरत है. इनमें गुजरात में हमारी भाभी भी है. उन्हें इंसाफ़ दिलाए जाने की ज़रूरत है. ये सरकार ऐसा नहीं कर रही है.


Facebook Comments

NO COMMENTS