“हज यात्रा रुकवाने वाले विधायक के पिताश्री सेफ्टी लॉक लगी रिवॉल्वर अपने कनपटी पर लगाकर सोनिया गाँधी की पीएम बनवा रहे थे” – नितिन ठाकुर

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पहली तस्वीर है बीजेपी के चरखारी से विधायक ब्रजभूषण राजपूत की। 35 साल के विधायक महोदय घोषित तौर पर 16 करोड़ रुपए से भी ज़्यादा की संपत्ति के मालिक हैं और 6 केस में आरोपी हैं………….।

इन्होंने कल ही कहा है कि अगर मंदिर नहीं बनने दिया जाएगा तो ये हज यात्रा को रोक देंगे। हां, बि्लकुल ये हज यात्रा रोक सकते हैं…..।

ये बिलकुल उसी तरह हज यात्रा रोक देंगे जैसे इनके चापलूस पिताजी ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनवा के छोड़ा था….।

इस पोस्ट की दूसरी तस्वीर में जो शख्स कनपटी पर पिस्तौल लगाए खड़ा है वो इनके पिता जी हैं……….।

दलबदल में माहिर…………………..।

1989 में जनता दल के टिकट पर हमीरपुर से सांसद बने और फिर 1996 और 98 में बीजेपी से जीते……….।

साल 2004 में ये साहब कांग्रेस में थे और 2009 में हाथी पर सवार होते हुए 2015 में फिर बीजेपी के कमल पर बैठ गए………।

18 मई 2004 को जब सोनिया गांधी ने पीएम पद ठुकराया तो ये साहब सोनिया के घर के बाहर एक गाड़ी की छत पर चढ़कर ड्रामा कर रहे थे………………।

हज यात्रा रोकने की गीदड़ भभकी देनेवाले ब्रजभूषण के पिताजी के बारे में उस दौरान उनकी ही पार्टी बीजेपी के पितृसंगठन आरएसएस का अनाधिकारिक मुखपत्र क्या लिखता है खुद पढ़ लीजिए:

“श्री राजपूत अपनी छड़ी से लोगों को अपने पास आने से रोक रहे थे और कह रहे थे, ‘सोनिया गांधी को बता दो वरना मैं खुद को गोली मार लूंगा।’

आस-पास जुटे कुछ कांग्रेसी इस “नाटक” से मजे लूटने लगे तो एक महिला ने उन्हें फटकारा।

आखिर में कार मालिक अपनी गाड़ी वहां से अलग ले गया और पुलिसकर्मियों ने श्री राजपूत से उनकी पिस्तौल छीन ली।

पूछने पर पता चला कि रिवाल्वर का “सेफ्टी लाक” लगा हुआ था, जिसको हटाए बिना गोली चल ही नहीं सकती थी।

अब तुगलक रोड थाने में श्री राजपूत के विरुद्ध मामला भी दर्ज हो गया है।”

तो अब आप समझ गए होंगे कि ये जनाब किस वीर पिता के वीर पुत्र हैं……………..

और जैसे इनके पिताश्री सेफ्टी लॉक लगी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारकर सोनिया के चरणों में न्यौछावर होने को राजी थे……………

ठीक वैसे ही ये अब हज यात्रा रोक कर दिखा देंगे…………….।

आजकल सारे बकवीर भाजपा में शामिल हो गए लगते हैं………………………।


-नितिन ठाकुर

नितिन ठाकुर

(नितिन ठाकुर फेसबुक यूज़र हैं, इनकी लेखनी बेबाक है। नितिन ठाकुर सत्य और की क़लम के सिपाही हैं। फेसबुक पर उन्होंने लिखा है कि मैं ‘नाकुछ’ होने की कोशिश में अपना नाम तक छोड़ देना चाहता हूं.. ‘कुछ होना’ ही फसाद की जड़ है। यह लेख उनकी फेसबुक की टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


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