“हदीसे नवबी और आज का आधुनिक विज्ञान” – अंजलि शर्मा

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आज से चौदह सौ साल पहले मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने कुछ ऐसी बातो का हुक्म दिया था जिनका समर्थन आज का आधुनिक विज्ञान करता है।

इनमे से हम यहा आप (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) सिर्फ एक ऐसे हुक्म पर रोशनी डालते है जिसका हुक्म आप ने पुरी दुनिया को दिया।

पर अफसोस के खुद को मुसलमान कहने वाले अपने प्यारे नबी की सारी व‌सियतो को भूल गये और दुनिया की चकाचौन्ध मे खो गये?

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ी अल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है कि, नबी-ए-करिम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया:

“जब तुम में से कोई खाना खाए तो वह अपना हाथ न पोछें यहां तक कि उसे (उंगलियां) चाट न‌ ले” (सही मुस्लिम हदीस न0 2031)

खाने के बाद उंगलियां चाटने का हुक्म पैगंबर ने चौदह सदियाँ पहले दिया। इसमें क्या हिकमत कर फ़रमा है इसकी पुष्टि चिकित्सा वैज्ञानिक इस दौर में कर रहे हैं।

जर्मनी के चिकित्सा विशेषज्ञों ने शोध के बाद यह निकाला है कि मनुष्य की उंगलियों के पोरों पर विशेष प्रकार के प्रोटीन उसे दस्त, उल्टी और हैज़े जैसी बीमारियों से बचाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार वह जीवाणु जिन्हें “ई कोलाई” कहते हैं, जब उंगलियों के पोरों पर आते हैं तो पोरों पर प्रोटीन स्वास्थ्य को हानी पहुंचाने वाले जीवाणु को समाप्त कर देती है।

इस तरह यह जीवाणु मानव शरीर पर रहकर हानिकारक नहीं बनते। खासकर इंसान को पसीना आता है तो कीटनाशक प्रोटीन गतिशील हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रोटीन न होती तो बच्चों में हैज़े, दस्त और उल्टी की बीमारियां अधिक होती।” (दैनिक नवाये वक़्त 30 जून 2005)

पश्चिमी लोग खाने के बाद उंगलियां चाटने के कार्य को घृणित करार देकर इस पर अक्षर पालन करते हैं, लेकिन अब विज्ञान इस बात की पुष्टि कर रही है जब अल्लाह तआला ने उंगलियों के पोरों पर कीटनाशक प्रोटीन पैदा की है तो हाथ से खाना और खाने के बाद उंगलियां चाटना दोनों स्वस्थ के कारण है।

नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की इस‌ हदीस में इसी बात पर अमल की हिदायत की गई है।

पर अफसोस के मुसलमानो अपने आक़ा कि सारी सुन्नतो को तर्क कर दिया और‌ मुसलमान मार्डन हो गये चम्मच छुरी और काटो से खाने को अपनी शान समझने लगे……………..।


-अंजली शर्मा

अंजलि शर्मा

(अंजली शर्मा सोशल मीडिया पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक लेखनी के लिए जानी जाती हैं। अंजलि शर्मा निस्पक्ष लेखन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतन्त्र लेखक हैं। अंजली शर्मा फेसबुक यूजर हैं और उन्होंने अपने फेसबुक इंट्रो में लिखा है ‘मानवता ही मेरा धर्म हे’। यह लेख उनकी फेसबुक की टाइम लाइन से लिया गया है। इस लेख के विचार पूर्णत: उनके हैं, इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी myzavia.com स्‍वागत करता है। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी myzavia.com@gmail.com भेजें।)


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