“IRF को बैन करना अमन, लोकतंत्र, इंसाफ और मुसलमानों के खिलाफ हमला, देश के लिये ये दुर्भाग्यपूर्ण” – डॉ. जाकिर नाइक

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इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत पांच साल के लिए बैन के बाद पहली जाकिर नाइक ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। आज शुक्रवार जाकिर नायक ने एक बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार का ये फैसला मुस्लिम, अमन, लोकतंत्र और इंसाफ के खिलाफ एक हमला है।

ये फैसला ऐसे वक्त लिया गया है जब सरकार नोटबंदी के फैसले की नाकमयाबी से जूझ रही है। अपनी असफलता से मीडिया का ध्यान भटकाने के लिये उन्होंने आनन-फानन में मेरे एनजीओ पर प्रतिबंध लगा दिया है। हाल ही में जाकिर नाइक के एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) को आतंकवाद निरोधक कानून (यूएपीए) के तहत पांच साल के लिए बैन कर दिया गया था।

जाकिर नाइक ने कहा कि वह अभी विदेश में है। अपने एनजीओ के बैन के खिलाफ वो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। और उन्हें पूरी उम्मीद है कि भारत की न्याय व्यवस्था इस साजिश को नाकाम करेगी। उनका कहना है कि ना तो मुझे इस बारे में कोई नोटिस दिया गया, ना तो कोई समन जारी किया गया औऱ ना ही मुझसे अपना पक्ष रखने के लिए संपर्क ही किया गया। जाकिर ने कहा कि मैने अपने मदद का पक्ष भी रखा लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया।

जाकिर नाइक ने अपने बयान में कहा है कि बिना किसी जांच के और किसी तरह की रिपोर्ट को पेश किये आईआऱएफ को बैन करना बताता है कि सरकार को एनजीओ बैन करना पहले से ही तय था। बैन करने की वजह मेरा मजहब है या कोई और वजह ये मायने नहीं रखती। पिछले 25 सालों से मैं भारतीय कानून के दायरे में रहकर मैं काम कर रहा हूं लेकिन अचानक मुझे बैन कर दिया जाता है, वाकई देश के लिये ये दुर्भाग्यपूर्ण है।

अपने बयान में जाकिर नाइक कहते हैं कि यूएपीए कानून का कभी इस्तेमाल योगी आदित्यनाथ, साध्वी प्राच्वी और राजेश्वर सिंह जैसे लोगों पर नहीं किया जाता जो लगातार राजनीतिक फायदे के लिये अपने बयानों से समाज में जहर घोलते हैं।

सरकार पर हमला बोलते हुए जाकिर नाइक कहते हैं देश को लोकतंत्र की जड़ो में लगातार हमला किया जा रहा है। लोगों की जिदंगी के साथ खेला जा रहा है। सरकार ऑथिरिटी का गलत इस्तेमाल देश की जनता पर कर रही है। वे इससे बचाव चाहते है। देश को बदलाव की जरुरत है।


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